हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों के कारण हर साल देशभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है। इसके अलावा देश में मौतों का एक बड़ा कारण समय पर जरूरी अंगों की अनुपलब्धता भी रही है। मेडिकल रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में हर साल प्रत्यारोपण के लिए जरूरी अंगों की कमी के कारण करीब पांच लाख लोगों की मौत हो जाती है। हर दिन कम से कम 15 लोगों की मौतों का एक बड़ा कारण अंगों की कमी है।
Organ Donation: अंगदान को बढ़ावा मिले तो बच सकती है लाखों जिंदगियां, केंद्र ने राज्यों को दी ये जरूरी सलाह
- भारत में हर साल प्रत्यारोपण के लिए जरूरी अंगों की कमी के कारण करीब पांच लाख लोगों की मौत हो जाती है। हर दिन कम से कम 15 लोगों की मौतों का एक बड़ा कारण अंगों की कमी है।
केंद्र की राज्य सरकारों की सलाह
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा है कि आपात स्थिति में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ताओं जैसे पुलिस कर्मियों, एम्बुलेंस चालकों और पैरा-मेडिकल कर्मचारियों के लिए राज्य और जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराए जाएं ताकि सड़क दुर्घटना पीड़ितों से अंग और ऊतक के दान की सुविधा मिल सके।
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने एक पत्र में कहा कि, हमारा देश अंगों की गंभीर कमी का सामना कर रहा है, हजारों मरीज विभिन्न अंगों की प्रतीक्षा सूची में हैं। अगर इन्हें समय पर जरूरी अंग प्राप्त हो जाएं तो इससे जान बचाना आसान हो सकता है।
पत्र में कहा गया है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 'भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2023' शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 1.7 लाख लोग मारे गए, जो संभावित अंगदाता हो सकते थे। इनमें से कई संभावित अंगदाता समय पर पहचान न होने और रेफरल न मिलने के कारण अंगदान नहीं कर पाते हैं।
डॉ.अनिल कुमार ने कहा आपात स्थिति में सबसे पहले सामने आने वाले सहायकर्ता जैसे पुलिसकर्मी, एम्बुलेंस चालक, आपातकालीन चिकित्सा वालों को अगर समय पर प्रतिशिक्षित किया जाए तो अंगदान को बढ़ावा दिया जा सकता है।
18 साल के किशोर के हृदय दान ने बचाई 13 वर्षीय लड़की की जान
भारत में ऑर्गन डोनेशन रेट दुनिया के सबसे कम दरों में से एक है। जागरूकता की कमी, सामाजिक मिथक, धार्मिक भ्रांतियां और प्रक्रिया को लेकर डर को इसका कारण माना जाता है। कई लोग यह नहीं जानते कि मृत्यु के बाद भी उनके अंग जैसे हृदय, लिवर, किडनी, आंखें और फेफड़े किसी और को जीवन दे सकते हैं।
अमर उजाला में सितंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया कि था किस तरह से 18 साल के एक किशोर के हृदय दान से 13 वर्षीय लड़की की जान बचाई गई थी। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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