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New Blood Test: लक्षण नहीं दिख रहे फिर भी पकड़ में आएगी हार्ट-किडनी की बीमारी, ब्लड टेस्ट खोलेगा सारे राज

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 14 May 2026 02:35 PM IST
सार

हार्ट और किडनी रोगों की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इनके गंभीर लक्षण अक्सर देर से सामने आते हैं। कई बार व्यक्ति को तब पता चलता है जब स्थिति काफी खराब हो चुकी होती है।  एक साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए शरीर में होने वाले ऐसे बदलावों को काफी पहले पहचाना जा सकता है, जो भविष्य में हार्ट डिजीज या किडनी फेलियर का कारण बन सकते हैं।

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हार्ट-किडनी की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

दुनियाभर के लोगों में बिगड़ती लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ आदतों ने कम उम्र में ही उन बीमारियों को काफी आम बना दिया है, जो कुछ दशकों पहले तक आमतौर पर 50-55 की उम्र के बाद देखी जाती थीं। लिहाजा हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, किडनी और दिल की बीमारियां काफी आम होती जा रही हैं। चिंता की बात यह है कि इन गंभीर बीमारियों के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण भी दिखाई नहीं देते। ज्यादातर मामलों में इनकी पहचान तब हो पाती है जब शरीर को पहले से काफी नुकसान हो चुका होता है।



यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच कराते रहने की सलाह देते हैं। हालांकि अब वैज्ञानिकों की टीम ने बीमारियों के समय रहते निदान को लेकर राहत भरी जानकारी साझा की है। इंग्लैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के शोधकर्ताओं ने बताया कि एक साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए ये जाना जा सकता है कि कहीं आपको भविष्य में हृदय और किडनी की बीमारियों का खतरा तो नहीं है? इन बीमारियों के  लक्षण दिखने से कई साल पहले ही ये टेस्ट आपको अलर्ट कर देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी मदद से न सिर्फ मरीजों का समय रहते सही इलाज हो सकेगा, साथ ही हृदय-किडनी की बीमारियों के कारण हर साल होने वाली लाखों मौतों के खतरे को भी कम किया जा सकेगा।

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बीमारियों का पता कैसे लगाएं? - फोटो : Adobe Stock Images

लक्षण दिखने से पहले चलेगा बीमारी का पता

शोधकर्ताओं की टीम ने रक्त वाहिकाओं के अंदर होने वाले बेहद सूक्ष्म क्षति को पहचानने का एक तरीका खोजा है। ये बदलाव दुनिया की कई सबसे घातक बीमारियों से जुड़े माने जाते हैं।
 

  • विशेषज्ञों ने कहा, ये ब्लड टेस्ट लाल रक्त कोशिकाओं यानी रेड ब्लड सेल्स में होने वाले बेहद हल्के स्तर के रासायनिक बदलावों का भी विश्लेषण कर सकता है। 
  • इनकी मदद से शरीर के भीतर हो रहे नुकसान का पता लगाना आसान हो सकता है।
  • अध्ययन में बताया गया है कि रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को हुए नुकसान की पहचान का ये तरीका डॉक्टरों को बीमारी के लक्षण सामने आने से पहले ही खतरे को समझने में मदद कर सकते हैं।
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हृदय रोगों का कैसे लगाएं पता? - फोटो : Adobe Stock

हृदय और किडनी की बीमारियों का पता लगाना होगा आसान

नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट
में  वैज्ञानिकों ने पाया कि सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं की परत को होने वाला नुकसान हृदय और किडनी की बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। 
 

  • पहले इस तरह के नुकसान का पता लगाने के लिए टिश्यू बायोप्सी और अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी जैसी जटिल तकनीकों की जरूरत पड़ती थी।
  • अब शोधकर्ताओं ने ग्लाइकोकैलिक्स नाम की एक बेहद पतली सुरक्षात्मक परत पर विशेष ध्यान दिया है। 
  • यह परत रक्त वाहिकाओं के अंदर होती है और यही नियंत्रित करती है कि खून में क्या अंदर जाएगा और क्या बाहर निकलेगा।
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खून की जांच - फोटो : Adobe Stock

खून की जांच खोल देगी भीतर के राज

अध्ययन के दौरान टीम ने यह पता लगाया कि रेड ब्लड सेल्स में एक तरह की बायोकैमिकल प्रिंट मौजूद होती है, जिससे रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। हालांकि यह टेस्ट अभी प्रयोग के स्तर पर है।

अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. मैथ्यू बटलर कहते हैं, हमारी रक्त वाहिकाओं का स्वास्थ्य पूरे शरीर के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। लेकिन रक्त वाहिका प्रणाली का एक बड़ा हिस्सा अभी भी डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की पहुंच से बाहर है, क्योंकि ये रक्त वाहिकाएं इतनी छोटी होती हैं कि इन्हें देखा नहीं जा सकता।

हमने पाया है कि रेड ब्लड सेल्स की सतह पर होने वाले बदलावों की मदद से अब सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं के क्षति की पहचान की जा सकती है। सबसे अच्छी बात यह है कि हम यह भी तेजी से पता लगा सकते हैं कि कोई दवा रक्त वाहिकाओं की परत को ठीक करने में असरदार है या नहीं?

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शरीर की स्थिति का चलेगा पता - फोटो : Adobe Stock Images

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों ने कहा,  ये खोज बीमारी को गंभीर या जानलेवा स्थिति तक पहुंचने से पहले पहचानने और उसका इलाज करने की दिशा का पूरी तरह से बदलने वाली हो सकती है।

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में रीनल और वैस्कुलर मेडिसिन के प्रोफेसर साइमन सैचेल कहते हैं, हमारे निष्कर्ष हार्ट-किडनी जैसी बीमारियों की पहचान करने के लिए साधन प्रदान करते हैं। हृदय का स्वास्थ्य किडनी के स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं की स्थिति को जांचने का यह नया तरीका किडनी और हृदय रोगों के शुरुआती चरण में हो रहे नुकसान की पहचान करने में भी बेहद अहम साबित हो सकता है।




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स्रोत: 
Identification of early warning biomarkers for type 4 cardio-renal syndrome based on bioinformatics analysis and secreted proteins

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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