दुनियाभर के लोगों में बिगड़ती लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ आदतों ने कम उम्र में ही उन बीमारियों को काफी आम बना दिया है, जो कुछ दशकों पहले तक आमतौर पर 50-55 की उम्र के बाद देखी जाती थीं। लिहाजा हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, किडनी और दिल की बीमारियां काफी आम होती जा रही हैं। चिंता की बात यह है कि इन गंभीर बीमारियों के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण भी दिखाई नहीं देते। ज्यादातर मामलों में इनकी पहचान तब हो पाती है जब शरीर को पहले से काफी नुकसान हो चुका होता है।
New Blood Test: लक्षण नहीं दिख रहे फिर भी पकड़ में आएगी हार्ट-किडनी की बीमारी, ब्लड टेस्ट खोलेगा सारे राज
हार्ट और किडनी रोगों की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इनके गंभीर लक्षण अक्सर देर से सामने आते हैं। कई बार व्यक्ति को तब पता चलता है जब स्थिति काफी खराब हो चुकी होती है। एक साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए शरीर में होने वाले ऐसे बदलावों को काफी पहले पहचाना जा सकता है, जो भविष्य में हार्ट डिजीज या किडनी फेलियर का कारण बन सकते हैं।
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लक्षण दिखने से पहले चलेगा बीमारी का पता
शोधकर्ताओं की टीम ने रक्त वाहिकाओं के अंदर होने वाले बेहद सूक्ष्म क्षति को पहचानने का एक तरीका खोजा है। ये बदलाव दुनिया की कई सबसे घातक बीमारियों से जुड़े माने जाते हैं।
- विशेषज्ञों ने कहा, ये ब्लड टेस्ट लाल रक्त कोशिकाओं यानी रेड ब्लड सेल्स में होने वाले बेहद हल्के स्तर के रासायनिक बदलावों का भी विश्लेषण कर सकता है।
- इनकी मदद से शरीर के भीतर हो रहे नुकसान का पता लगाना आसान हो सकता है।
- अध्ययन में बताया गया है कि रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को हुए नुकसान की पहचान का ये तरीका डॉक्टरों को बीमारी के लक्षण सामने आने से पहले ही खतरे को समझने में मदद कर सकते हैं।
हृदय और किडनी की बीमारियों का पता लगाना होगा आसान
नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने पाया कि सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं की परत को होने वाला नुकसान हृदय और किडनी की बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है।
- पहले इस तरह के नुकसान का पता लगाने के लिए टिश्यू बायोप्सी और अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी जैसी जटिल तकनीकों की जरूरत पड़ती थी।
- अब शोधकर्ताओं ने ग्लाइकोकैलिक्स नाम की एक बेहद पतली सुरक्षात्मक परत पर विशेष ध्यान दिया है।
- यह परत रक्त वाहिकाओं के अंदर होती है और यही नियंत्रित करती है कि खून में क्या अंदर जाएगा और क्या बाहर निकलेगा।
खून की जांच खोल देगी भीतर के राज
अध्ययन के दौरान टीम ने यह पता लगाया कि रेड ब्लड सेल्स में एक तरह की बायोकैमिकल प्रिंट मौजूद होती है, जिससे रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। हालांकि यह टेस्ट अभी प्रयोग के स्तर पर है।
अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. मैथ्यू बटलर कहते हैं, हमारी रक्त वाहिकाओं का स्वास्थ्य पूरे शरीर के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। लेकिन रक्त वाहिका प्रणाली का एक बड़ा हिस्सा अभी भी डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की पहुंच से बाहर है, क्योंकि ये रक्त वाहिकाएं इतनी छोटी होती हैं कि इन्हें देखा नहीं जा सकता।
हमने पाया है कि रेड ब्लड सेल्स की सतह पर होने वाले बदलावों की मदद से अब सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं के क्षति की पहचान की जा सकती है। सबसे अच्छी बात यह है कि हम यह भी तेजी से पता लगा सकते हैं कि कोई दवा रक्त वाहिकाओं की परत को ठीक करने में असरदार है या नहीं?
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों ने कहा, ये खोज बीमारी को गंभीर या जानलेवा स्थिति तक पहुंचने से पहले पहचानने और उसका इलाज करने की दिशा का पूरी तरह से बदलने वाली हो सकती है।
ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में रीनल और वैस्कुलर मेडिसिन के प्रोफेसर साइमन सैचेल कहते हैं, हमारे निष्कर्ष हार्ट-किडनी जैसी बीमारियों की पहचान करने के लिए साधन प्रदान करते हैं। हृदय का स्वास्थ्य किडनी के स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं की स्थिति को जांचने का यह नया तरीका किडनी और हृदय रोगों के शुरुआती चरण में हो रहे नुकसान की पहचान करने में भी बेहद अहम साबित हो सकता है।
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स्रोत:
Identification of early warning biomarkers for type 4 cardio-renal syndrome based on bioinformatics analysis and secreted proteins
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