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Health Alert: फोन पर घंटों बात करते रहते हैं तो हो जाइए सावधान, कहीं ये आदत आपको बहरा न बना दे?

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 06 Apr 2025 07:43 PM IST
सार

कम उम्र के लोगों में कान की बीमारी या कम सुनाई देने की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है, यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। फोन पर घंटों बात करते रहते हैं या अक्सर ईयरफोन-हेडफोन लगाकर गाने सुनते रहते हैं तो सावधान हो जाइए।

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Talking on Phone for Long Hours May Lead to Hearing Loss know Can cell phones cause ear problems
मोबाइल पर आप भी तो नहीं करते रहते हैं लंबी बातें - फोटो : Freepik.com
क्या आप भी फोन पर घंटों बात करते रहते हैं? अक्सर ईयरफोन-हेडफोन लगाकर गाने सुनते रहते हैं? अगर हां, तो तुरंत इन आदतों में सुधार कर लें वरना बहुत जल्दी आपके सुनने की शक्ति छिन सकती है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार अलर्ट करते रहे हैं कि कम उम्र के लोगों में कान की बीमारी या कम सुनाई देने की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है, यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। तेज आवाज में गाना सुनने और घंटों फोन कॉल पर बात करने की आदत युवाओं को बहरा बना सकती है।
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Talking on Phone for Long Hours May Lead to Hearing Loss know Can cell phones cause ear problems
कम सुनाई देने की समस्या - फोटो : Freepik.com

100 करोड़ से अधिक लोगों में बहरेपन का खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी पहले ही अलर्ट कर चुका है कि 12 से 35 वर्ष की आयु के एक बिलियन (100 करोड़) से अधिक लोगों में सुनने की क्षमता कम होने या बहरेपन का जोखिम हो सकता है। इसके लिए मुख्यरूप से लंबे समय तक ईयरबड्स से तेज आवाज में संगीत सुनने और शोरगुल वाली जगहों पर रहना एक बड़ा कारण माना जा रहा है। तेज आवाज वाले ये उपकरण आंतरिक कान को क्षति पहुंचाते हैं। सभी लोगों को इन उपकरणों का इस्तेमाल बड़ी सावधानी से करना चाहिए।

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युवाओं में बढ़ती बहरेपन की समस्या - फोटो : Adobe stock photos

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

दिल्ली-एनसीआर के एक अस्पताल से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक 18 से 30 वर्ष की उम्र करीब 1400 मरीज हर महीने अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इन्हें कम सुनाई देने, कानों में सीटी की आवाज आने जैसी दिक्कतें होती हैं। 

ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स ) के  ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. हुकम सिंह बताते हैं, ईयरफोन, हेडफोन के अलावा अन्य गाने सुनने के उपकरणों से तेज ध्वनि में संगीत कानों पर नकारात्मक असर डाल रही है। फोन पर लगातार बात करने की आदत भी खतरनाक है। इन आदतों के कारण लोगों को कान बहने, कम सुनाई देने और अजीब तरीके की आवाजें गूंजने की समस्या हो रही है।

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ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल हानिकारक - फोटो : Freepik.com

तेज आवाज कानों के लिए ठीक नहीं

अध्ययनों से पता चलता है कि ईयरबड्स या हेडफोन के साथ पर्सनल म्यूजिक प्लेयर का इस्तेमाल करने वाले लगभग 65 प्रतिशत लोग लगातार 85 (डेसिबल) से ज्यादा आवाज में इसे प्रयोग में लाते हैं। इतनी तीव्रता वाली आवाज को कानों के आंतरिक हिस्से के लिए काफी हानिकारक पाया गया है।  युवा आबादी में फोन पर बहुत बात करना या ईयरबड्स जैसे उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल 40 की उम्र तक सुनने की क्षमता को कम कमजोर करने वाली स्थिति हो सकती है।

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इयरफोन से कानों को नुकसान - फोटो : Freepik.com

अध्ययन में क्या पता चला?

बीएमजे पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में 50,000 से अधिक लोगों का विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि वीडियो गेम्स के दौरान होने वाली आवाज तय सीमा से कहीं अधिक होती है।

सामान्य लोगों के लिए 25-30 डेसीबल ध्वनि को पर्याप्त माना जाता है, जबकि  80-90 डेसीबल ध्वनि श्रवण शक्ति को स्थायी हानि पहुंचाने वाली हो सकती है। विश्लेषण के दौरान पाया गया कि वीडियो गेमिंग के समय अधिकतर लोगों का ध्वनि स्तर 85 और 90 डेसीबल के आसपास रहा, जो कानों की सहनशक्ति से कहीं अधिक है। इससे बहरेपन का जोखिम हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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