जिंसी सारा जेकब, नर्स
ढाई साल से नहीं देखा परिवार को, दिन-रात कोरोना मरीजों की कर रही हैं देखभाल
-पैनिक कर रहे मरीजों की देखभाल आप किस तरह से करते हैं?
कोरोना की दूसरी लहर में अधिकांश मरीज पैनिक कर रहे हैं। ऐसे में हमें ही उन्हें संभालना होता है। कई बार मरीज अन्य मरीज की स्थिति देखकर भी घबरा जाता है। ऐसे में हम उन्हें समझाते हैं कि सब का शरीर अलग होता है। वो मरीज को पहले से कोई बीमारी होगी या अन्य समस्या होगी इसलिए उसका ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है या अन्य समस्या हो रही है। यदि मरीज घबराएंगे तो उनका स्वास्थ्य और भी बिगड़ेगा इसलिए उन्हें संभालना जरूरी होता है।
-आप अपने परिवार से कब से नहीं मिली हैं?
मेरा परिवार केरल में है, फोन पर बात होती रहती है पर पिछले ढाई वर्ष से मैं अपने परिवार से नहीं मिल सकी हूं। पिछले वर्ष घर जाने के बारे में सोचा था लेकिन सभी दूर कोरोना के फैल जाने से जाना संभव नहीं हो सका। अब जब सब ठीक हो जाएगा, तभी अपने घर जाऊंगी। ऐसे समय अस्पताल में हमारी आवश्यकता है।
-इतने लंबे समय से आप कोरोना के मरीजों को देख रही हैं, क्या आपको कभी डर लगता है?
नहीं, हमें कोरोना से डर नहीं लगता क्योंकि हम ऐसा ख्याल ही नहीं लाते हैं कि हमें कोरोना हो जाएगा। पिछले एक साल में कई बार मुझे भी ऐसा लगा कि जुकाम हो रहा है बुखार आ रहा है लेकिन एक गोली खाकर हम अस्पताल चले गए, वहां अपना काम करने लगे। काम करते वक्त अपना व टीम की सेहत का पूरे ध्यान रखते हैं। पूरे समय पीपीई किट पहनकर रखते हैं।
-ऐसा पल जब आपको महसूस हुआ कि आपका इस पेशे को चुनना सफल हो गया है?
जब से कोरोना आया है, तब से ऐसे कई सारे पल आए हैं। मरीज जब आता है तब वह बहुत परेशान होता है। अस्पताल में जब उसको इलाज मिलता है, उसकी देखभाल की जाती है तो वह जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं। कई मरीजों की जब छुट्टी की जाती है तो वे हमारे हाथ जोड़ने लगते हैं। हमारी खूब तारीफ करते हैं, हमें खूब दुआएं मिलती हैं। इन सबसे हमें बहुत शक्ति मिलती है।
