Thyroid And Fertility Link: थायरॉइड ग्रंथि हमारे गले के निचले हिस्से में स्थित एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि है, लेकिन इसका प्रभाव पूरे शरीर के प्रजनन तंत्र पर बहुत गहरा होता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, थायरॉइड हार्मोन (T3 और T4) शरीर की हर कोशिका के मेटाबॉलिज्म और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करते हैं। जब यह ग्रंथि बहुत कम (हाइपोथायरायडिज्म) या बहुत अधिक (हाइपरथायरायडिज्म) हार्मोन बनाने लगती है, तो यह महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता को सीधे प्रभावित करती है।
Thyroid: थायरॉइड की समस्या बिगाड़ सकती है आपकी प्रजनन क्षमता? जान लें इसके पीछे का विज्ञान
How Thyroid Affects Ovulation?: थायरॉइड एक ऐसी समस्या है जिससे हमारे देश की एक बड़ी आबादी परेशान है। आमतौर पर यह महिलाओं में अधिक देखने मिलता है मगर बहुत से पुरुष में इसके जद में आते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये बीमारी पुरुष और महिला दोनों के प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
महिलाओं में ओव्यूलेशन और पीरियड्स पर प्रभाव
महिलाओं में थायरॉइड हार्मोन और प्रजनन हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) के बीच एक बारीक संतुलन होता है। जब थायरॉइड का लेवल बिगड़ता है, तो पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं या पूरी तरह रुक सकते हैं, जिसे एनोव्यूलेशन कहा जाता है। इसकी वजह से अंडे की गुणवत्ता कम हो सकती है और गर्भाशय की परत कमजोर हो जाती है, जिससे भ्रूण का आरोपण चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
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पुरुषों की प्रजनन क्षमता और थायरॉइड
अक्सर माना जाता है कि थायरॉइड सिर्फ महिलाओं को प्रभावित करता है, लेकिन यह पुरुषों की फर्टिलिटी के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। थायरॉइड का असंतुलन शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गतिशीलता और बनावट को नुकसान पहुंचा सकता है। पुरुषों में थायरॉइड की समस्या टेस्टोस्टेरोन के लेवल को कम कर सकती है, जिससे कामेच्छा में कमी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
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गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का जोखिम
गर्भधारण के बाद भी थायरॉइड का लेवल स्थिर रहना जरूरी है। गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में भ्रूण पूरी तरह से मां के थायरॉइड हार्मोन पर निर्भर होता है। अगर मां में थायरॉइड की कमी हो, तो यह गर्भपात, समय से पहले प्रसव और बच्चे के मानसिक विकास में बाधा का कारण बन सकता है। इसलिए कंसीव करने से पहले और गर्भावस्था के दौरान नियमित थायरॉइड जांच जरूरी है।
सही जांच और उपचार है समाधान
थायरॉइड के कारण होने वाली फर्टिलिटी समस्याओं की सबसे अच्छी बात यह है कि इन्हें उपचार के जरिए पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उचित दवा, संतुलित आहार (आयोडीन और सेलेनियम युक्त) और तनावमुक्त जीवनशैली से थायरॉइड को नियंत्रित कर प्रजनन क्षमता को ठीक किया जा सकता है। अगर आप भी गर्भधारण की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले अपने टीएसएच स्तर की जांच कराकर डॉक्टर से परामर्श लें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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