क्या आप भी प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रही हैं? अगर हां तो इससे पहले एक बार अपनी सेहत की अच्छे से जांच जरूर करा लें, मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कई प्रकार की स्वास्थ्य स्थितियां गर्भधारण में बाधा बन सकती हैं।
जानना जरूरी: कहीं थायरॉइड की समस्या तो नहीं बन रही प्रेग्नेंसी में बाधा? तुरंत करा लें इसकी जांच
Thyroid Imbalance and Pregnancy: थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन महिलाओं में पीरियड्स और ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकता है, जिससे गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड की समस्या से कुछ जटिलताओं का खतरा भी बढ़ता है। सही समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
थायरॉइड गर्दन में पीछे की ओर मौजूद एक छोटी ग्रंथि होती है, जो मेटाबॉलिज्म के साथ प्रजनन से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करती है। जब यह ग्रंथि कम हार्मोन बनाती है, तो इसे हाइपोथायरॉइडिज्म और ज्यादा हार्मोन बनाती है, तो हाइपरथायरॉइडिज्म कहते हैं। दोनों ही स्थितियों में कुछ महिलाओं के पीरियड्स और ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि समय पर थायरॉइड की जांच और हार्मोनल संतुलन को ठीक करने के उपाय करके स्वास्थ्य संबंधित जटिलताओं को कम किया जा सकता है।
प्रेग्नेंसी के लिए क्यों जरूरी है थायरॉइड हार्मोन?
थायरॉइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म के अलावा प्रजनन संबंधी हार्मोन के संतुलन में भी भूमिका निभाते हैं। इनका स्तर बिगड़ने पर पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
ओव्यूलेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें अंडाशय से अंडा निकलता है और उसके निषेचित होने पर गर्भधारण की संभावना बनती है। लंबे समय तक अगर हाइपोथायरॉइडिज्म पर ध्यान न दिया जाए या फिर इसका इलाज न हो तो गर्भधारण में परेशानी हो सकती है।
कहीं आपको भी तो नहीं है थायरॉइड की समस्या?
थायरॉइड हार्मोन्स का कम या ज्यादा बनना दोनों ही सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है।
- हाइपोथायरॉइडिज्म में थायरॉइड हार्मोन कम बनता है। इससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान अगर इसकी दिक्कत होती है तो इससे गर्भपात और समय से पहले प्रसव जैसी जटिलताओं का भी खतरा बढ़ सकता है।
- इसी तरह हाइपरथायरॉइडिज्म इसमें शरीर में थायरॉइड हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनता है। इससे मासिक धर्म में बदलाव और गर्भधारण से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान इसका नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि इससे मां और बच्चे दोनों की सेहत पर असर हो सकता है।
प्रेग्नेंसी से पहले थायरॉइड है तो क्या करें?
प्रेग्नेंसी से पहले थायरॉइड की समस्या आपके लिए गर्भधारण को मुश्किल बना सकती है, यही कारण है कि इसकी जांच जरूरी है। अगर पीरियड्स अनियमित हैं या गर्भधारण में परेशानी हो रही है तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
- प्रेग्नेंसी की प्लानिंग पहले थायरॉइड हार्मोन की जांच कराएं। अगर इसमें कोई समस्या है तो इसका इलाज कराएं।
- थायरॉइड की समस्या के साथ प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं तो पहले डॉक्टर की सलाह ले लें।
- महिलाओं को खानपान पर भी ध्यान देना चाहिए। आयोडीन थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी है।
- खाने में सामान्य मात्रा में आयोडीन युक्त नमक इस्तेमाल करें। हालांकि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सप्लीमेंट न लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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