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What is Doom Scrolling: सुबह थकान और स्ट्रेस की वजह हो सकती है डूम स्क्रोलिंग! जानें इसके बारे में हर डिटेल
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 23 Jun 2026 01:35 PM IST
सार
What is Doom Scrolling: अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जिन्हें सुबह उठते ही थकान लगने लगती है तो ये खबर आपके लिए काफी अहम है। यहां हम आपको बताएंगे कि आपकी कौन सी आदत इसके पीछे का कारण हो सकती है।
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डूम स्क्रोलिंग क्या है?
- फोटो : AI
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What is Doom Scrolling: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही और रात सोने से पहले तक ज्यादातर लोग मोबाइल स्क्रीन पर सोशल मीडिया, न्यूज और वीडियो स्क्रॉल करते रहते हैं।
डूम स्क्रोलिंग क्या है?
- फोटो : Freepik.com
शरीर के साथ दिमाग पर भी पड़ता है प्रभाव
डूम स्क्रोलिंग का असर केवल मानसिक तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर और दिमाग दोनों की कार्यप्रणाली को गहराई से प्रभावित करता है। जब कोई व्यक्ति लगातार देर रात तक मोबाइल पर सोशल मीडिया, न्यूज या वीडियो स्क्रॉल करता रहता है, तो उसका दिमाग आराम की स्थिति में नहीं आ पाता।
डूम स्क्रोलिंग का असर केवल मानसिक तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर और दिमाग दोनों की कार्यप्रणाली को गहराई से प्रभावित करता है। जब कोई व्यक्ति लगातार देर रात तक मोबाइल पर सोशल मीडिया, न्यूज या वीडियो स्क्रॉल करता रहता है, तो उसका दिमाग आराम की स्थिति में नहीं आ पाता।
डूम स्क्रोलिंग क्या है?
- फोटो : Freepik.com
ब्रेन लगातार जानकारी प्रोसेस करता रहता है, जिससे मानसिक थकान बढ़ती है और नींद का प्राकृतिक चक्र बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर यह होता है कि व्यक्ति पूरी नींद नहीं ले पाता और सुबह उठते ही भारीपन, थकान और सुस्ती महसूस करता है।
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डूम स्क्रोलिंग क्या है?
- फोटो : फ्री पिक
होती है तनाव की समस्या
इसके अलावा लगातार नेगेटिव न्यूज, विवादित कंटेंट या तनाव पैदा करने वाली पोस्ट देखने से दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे चिंता, तनाव और ओवरथिंकिंग की समस्या बढ़ने लगती है। व्यक्ति अनजाने में ही हर समय दिमाग में नकारात्मक विचारों को जगह देने लगता है, जिससे मानसिक शांति प्रभावित होती है। धीरे-धीरे यह आदत मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी का कारण भी बन सकती है, जो दैनिक जीवन और कामकाज पर असर डालती है।
इसके अलावा लगातार नेगेटिव न्यूज, विवादित कंटेंट या तनाव पैदा करने वाली पोस्ट देखने से दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे चिंता, तनाव और ओवरथिंकिंग की समस्या बढ़ने लगती है। व्यक्ति अनजाने में ही हर समय दिमाग में नकारात्मक विचारों को जगह देने लगता है, जिससे मानसिक शांति प्रभावित होती है। धीरे-धीरे यह आदत मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी का कारण भी बन सकती है, जो दैनिक जीवन और कामकाज पर असर डालती है।
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डूम स्क्रोलिंग क्या है?
- फोटो : Freepik.com
विशेषज्ञों के अनुसार, डूम स्क्रोलिंग का सीधा संबंध डोपामिन सिस्टम से भी होता है, जो दिमाग में “रिवार्ड सेंटर” की तरह काम करता है। जब व्यक्ति हर समय नई-नई और रोचक या नकारात्मक जानकारी स्क्रॉल करता है, तो दिमाग डोपामिन रिलीज करता रहता है। इससे अस्थायी खुशी तो मिलती है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत बढ़ती जाती है और व्यक्ति मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने लगता है। यह डिजिटल एडिक्शन का रूप ले सकता है, जो मानसिक थकान को और अधिक बढ़ा देता है।