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Best Time To Sleep At Night: सही समय पर नींद क्यों है जरूरी? जानें देर रात जागने के नुकसान
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Mon, 22 Jun 2026 02:52 PM IST
सार
Best Time To Sleep At Night: आज के समय में युवा रात-रात भर जागकर फोन चलाते हैं, ऑफिस का काम निपटाते हैं। ये कितना सही है, आइए इस बारे में आज बात करते हैं।
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सोने का सही समय क्या है?
- फोटो : AI
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Best Time To Sleep At Night: आज की डिजिटल लाइफस्टाइल में देर रात तक जागना एक आम आदत बन चुकी है। युवा वर्ग अक्सर मोबाइल फोन चलाने, सोशल मीडिया देखने या ऑफिस का काम पूरा करने के लिए अपनी नींद से समझौता कर लेते हैं। लेकिन क्या यह आदत शरीर के लिए सही है?
सोने का सही समय क्या है?
- फोटो : Freepik.com
क्या है सोने का सही समय?
रात में सही समय पर सोना केवल आराम करने का तरीका नहीं है, बल्कि यह शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य को संतुलित रखने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि व्यक्ति रोजाना रात 10 बजे से 11 बजे के बीच सो जाता है, तो उसका शरीर प्राकृतिक रूप से अपनी बायोलॉजिकल क्लॉक (सर्केडियन रिदम) के अनुसार काम करता है। इस समय शरीर धीरे-धीरे रिलैक्स मोड में चला जाता है, जिससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है और गहरी नींद (डीप स्लीप) लेने में मदद मिलती है।
रात में सही समय पर सोना केवल आराम करने का तरीका नहीं है, बल्कि यह शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य को संतुलित रखने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि व्यक्ति रोजाना रात 10 बजे से 11 बजे के बीच सो जाता है, तो उसका शरीर प्राकृतिक रूप से अपनी बायोलॉजिकल क्लॉक (सर्केडियन रिदम) के अनुसार काम करता है। इस समय शरीर धीरे-धीरे रिलैक्स मोड में चला जाता है, जिससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है और गहरी नींद (डीप स्लीप) लेने में मदद मिलती है।
सोने का सही समय क्या है?
- फोटो : Freepik.com
गहरी नींद है जरूरी
गहरी नींद के दौरान शरीर में ग्रोथ हार्मोन सक्रिय होता है, जो मांसपेशियों की मरम्मत, कोशिकाओं की रिकवरी और शरीर की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाता है। साथ ही, दिमाग दिनभर की थकान और तनाव को प्रोसेस करके अगले दिन के लिए खुद को तैयार करता है। इससे याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता में सुधार होता है।
गहरी नींद के दौरान शरीर में ग्रोथ हार्मोन सक्रिय होता है, जो मांसपेशियों की मरम्मत, कोशिकाओं की रिकवरी और शरीर की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाता है। साथ ही, दिमाग दिनभर की थकान और तनाव को प्रोसेस करके अगले दिन के लिए खुद को तैयार करता है। इससे याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता में सुधार होता है।
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सोने का सही समय क्या है?
- फोटो : Freepik.com
ज्यादा जागने के नुकसान
दूसरी ओर, जो लोग नियमित रूप से देर रात तक जागते हैं, उनकी नींद का चक्र बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन, तनाव और फोकस की कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक यह आदत मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकती है।
दूसरी ओर, जो लोग नियमित रूप से देर रात तक जागते हैं, उनकी नींद का चक्र बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन, तनाव और फोकस की कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक यह आदत मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकती है।
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सोने का सही समय क्या है?
- फोटो : Freepik.com
डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनाना जरूरी
इसके अलावा, रात में ज्यादा स्क्रीन टाइम लेने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर प्रभावित होता है, जो नींद लाने में मदद करता है। इसलिए अच्छी नींद के लिए केवल जल्दी सोना ही नहीं, बल्कि सोने से पहले मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनाना भी जरूरी है। नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार और मानसिक शांति के साथ सही समय पर नींद लेना एक स्वस्थ जीवनशैली की कुंजी माना जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
इसके अलावा, रात में ज्यादा स्क्रीन टाइम लेने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर प्रभावित होता है, जो नींद लाने में मदद करता है। इसलिए अच्छी नींद के लिए केवल जल्दी सोना ही नहीं, बल्कि सोने से पहले मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनाना भी जरूरी है। नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार और मानसिक शांति के साथ सही समय पर नींद लेना एक स्वस्थ जीवनशैली की कुंजी माना जाता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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