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Health Alert: इस संक्रमण के कारण हर साल करीब 20 लाख लोगों की हो जाती है मौत, डब्ल्यूएचओ भी चिंतित

Thu, 03 Apr 2025 07:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 03 Apr 2025 07:44 PM IST
सार

डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में गंभीर फंगल संक्रमणों के इलाज और उनकी जांच के लिए उपलब्ध संसाधनों की गंभीर कमी को उजागर किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दशक में अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन ने केवल चार नई एंटीफंगल दवाओं को ही मंजूरी दी है।

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WHO report on Dangerous Fungal Infection Increasing know Fungal Infection Mortality rate
फंगल संक्रमण और इसके जोखिम - फोटो : freepik.com

दुनियाभर में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उन्हें संक्रामक बीमारियों का जोखिम भी अधिक होता है। बीते वर्षों में हम सभी ने कोरोना जैसे खतरनाक वायरल संक्रमण के दुष्प्रभावों को झेला है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ वायरल-बैक्टीरियल और फंगल सभी प्रकार के संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट करते हैं। 



फंगल संक्रमण तब होता है जब कवक (फंगस) शरीर के किसी हिस्से में अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगते हैं। ये सूक्ष्मजीव प्राकृतिक रूप से पर्यावरण जैसे मिट्टी, पौधों में मौजूद होते हैं हालांकि कुछ परिस्थितियों में ये हानिकारक हो सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक हालिया रिपोर्ट में फंगल संक्रमण के बढ़ते मामलों और इसके कारण होने वाले जोखिमों को लेकर सभी लोगों को सावधान किया है। 

WHO report on Dangerous Fungal Infection Increasing know Fungal Infection Mortality rate
फंगल संक्रमण के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe stock

कमजोर इम्युनिटी वाले लोग रहें सावधान

शोध के अनुसार, कमजोर इम्यून सिस्टम जैसे एचआईवी/एड्स, कैंसर के इलाज के दौरान या जिन लोगों को डायबिटीज होता है उन्हें फंगल संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है। एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक इस्तेमाल ने भी इस खतरे को काफी बढ़ा दिया है।

  • लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स लेने से शरीर के लाभकारी बैक्टीरिया नष्ट हो सकते हैं, इसके कारण भी यीस्ट इन्फेक्शन जैसे मामले काफी बढ़ सकते हैं।  
  • कुछ फंगल संक्रमण, मिट्टी, धूल, या पक्षियों की बीट से भी हवा के माध्यम से फैल सकते हैं। ये फेफड़ों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
  • तंग कपड़े पहनना, हाइजीन की कमी या संक्रमित व्यक्ति के साथ तौलिया/कपड़े का इस्तेमाल करना भी आपको फंगल संक्रमण का शिकार बना सकता है।
WHO report on Dangerous Fungal Infection Increasing know Fungal Infection Mortality rate
फंगल संक्रमण की गंभीर समस्याएं - फोटो : Adobe stock photos

हर साल करीब 20 लाख लोगों की हो रही है मौत

साल 2022 की रिपोर्ट के अनुसार फंगल संक्रमण हर साल 15-20 लाख लोगों की मृत्यु का कारण बनते हैं, जो टीबी या मलेरिया से होने वाली मौतों के बराबर है। द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, एंटीफंगल दवाओं के प्रति फंगस में प्रतिरोध बढ़ रहा है, जिससे इलाज मुश्किल होता रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से तैयार फंगल प्राथमिकता रोगजनकों की सूची  में कहा गया है कि अहम प्राथमिकता श्रेणी में आने वाले फंगल संक्रमण की मृत्यु दर 88% तक पहुंच सकती है।

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WHO report on Dangerous Fungal Infection Increasing know Fungal Infection Mortality rate
डब्ल्यूएओ ने जताई चिंता - फोटो : Freepik.com

इलाज के लिए संसाधनों की भी कमी

डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में गंभीर फंगल संक्रमणों के इलाज और उनकी जांच के लिए उपलब्ध संसाधनों की गंभीर कमी को उजागर किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दशक में अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन ने केवल चार नई एंटीफंगल दवाओं को ही मंजूरी दी है। फिलहाल नौ एंटीफंगल दवाएं नैदानिक विकास के चरण में हैं, लेकिन इनमें से केवल तीन अंतिम परीक्षण में हैं। यानी अगले कुछ वर्षों में कुछ ही नई दवाएं मिल पाएंगी।

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WHO report on Dangerous Fungal Infection Increasing know Fungal Infection Mortality rate
इम्युनिटी मजबूत करने पर दें जोर - फोटो : Freepik.com

गंभीर स्तर के फंगल संक्रमण को लेकर अलर्ट

डब्ल्यूएचओ ने गंभीर स्तर के फंगल संक्रमण से निपटने के लिए वैश्विक अनुसंधान तेज करने की अपील की है। शीर्ष स्वास्थ्य एजेंसी ने वैश्विक स्तर पर फंगल संक्रमणों की निगरानी को मजबूत करने, दवा विकास के लिए वित्तीय प्रोत्साहन बढ़ाने, नई दवाओं की खोज के लिए शोध को समर्थन देने और रोगियों की प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाने वाले उपचारों पर ध्यान केंद्रित करने की सिफारिश की है। इसके साथ सभी लोगों को इस संक्रमण से बचाव के लिए भी नियमित रूप से सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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