शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए अच्छी नींद लेना बहुत आवश्यक माना जाता है। ये मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार की सेहत को ठीक रखने के लिए जरूरी है। डॉक्टर बताते हैं, जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा रहता है।
Sleep Disorders: नींद न आना बड़ी बीमारियों को है न्योता, आप भी हैं शिकार तो तुरंत सुधार लें ये आदतें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, पर्याप्त नींद न लेने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, मानसिक संतुलन बिगड़ता है और कई क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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नींद की कमी का सेहत पर होता है असर
अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियां और मानसिक रोग के शिकार लोगों की भी नींद अक्सर बाधित रहती है।
नींद की कमी का सबसे बड़ा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। जब हम पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो दिमाग को आराम करने का मौका नहीं मिलता। इससे तनाव, चिंता, अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
इसी तरह से नींद की कमी दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर को भी बढ़ा देती है। जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नींद की बढ़ती समस्याओं के लिए मोबाइल या कंप्यूटर जैसे स्क्रीन्स का अधिक इस्तेमाल भी एक कारण माना जा सकता है। इन उपकरणों से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद के लिए आवश्यक मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को रोकती है। नींद में सुधार के लिए कुछ उपाय मददगार हो सकते हैं।
सोने का समय निर्धारित करें
हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। इससे शरीर का बायोलॉजिकल क्लॉक नियमित होता है, जिससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। इसके अलावा कमरे को नींद के अनुकूल बनाएं। कमरा शांत, अंधेरा वाला और ठंडा होना चाहिए। अनुकूल माहौल में अच्छी नींद मिलती है।
शारीरिक सक्रियता बढ़ाना जरूरी
नियमित शारीरिक व्यायाम नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में सहायक है। व्यायाम करने से शरीर को थकावट महसूस होती है, जिससे सोने में आसानी होती है। ध्यान रहे कि सोने से पहले व्यायाम न करें, क्योंकि यह शारीरिक उत्तेजना बढ़ा सकता है। ध्यान, गहरी सांस लेने की तकनीक और मांसपेशियों को आराम देने वाली एक्सरसाइज सोने से पहले करने से तनाव कम होता है और नींद में सुधार होता है।
स्मार्टफोन और स्क्रीन पर अपना समय कम करें
सोने से 1-2 घंटे पहले स्मार्टफोन, कंप्यूटर, या टेलीविजन का इस्तेमाल न करें। इन उपकरणों की ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के स्तर को प्रभावित करती है, जिससे नींद आने में परेशानी होती है। मेलाटोनिन एक प्राकृतिक हार्मोन है जो नींद को नियंत्रित करता है। अनिद्रा के शिकार लोग डॉक्टर से सलाह लेकर इसका सप्लीमेंट ले सकते हैं। अगर नींद की समस्या किसी मानसिक विकार जैसे अवसाद या एंग्जायटी के कारण है, तो इसके लिए मनोचिकित्सक से सलाह लें।
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नोट- यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।