वैश्विक स्तर पर पिछले एक-दो दशक में कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों के मामले काफी तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए गए हैं। लगभग सभी उम्र के लोग इसका शिकार पाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज-हार्ट की समस्याओं के साथ बच्चों-युवाओं में बढ़ती न्यूरोलॉजिकल बीमारियां गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। इससे न सिर्फ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होने का खतरा रहता है, साथ ही ये क्वालिटी ऑफ लाइफ को भी गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती हैं।
World Alzheimer's Day 2024: दुनियाभर में बढ़ रहे हैं अल्जाइमर रोग के मामले, बचाव के लिए जरूर करिए ये उपाय
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अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, अल्जाइमर रोग, मनोभ्रंश (डिमेंशिया) का सबसे आम रूप है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ कहते हैं, अल्जाइमर का कारण क्या है, इस बारे में ज्यादा पता नहीं चल पाया है। कुछ जीन को इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसके अलावा आहार और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के कारण भी इस रोग का खतरा काफी बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के खतरे को कम करने के लिए कुछ उपायों को कारगर पाया है। इसका सभी लोगों को पालन करना चाहिए।
ऑलिव ऑयल के हो सकते हैं विशेष लाभ
हार्वर्ड विश्वविद्यालय सहित शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने ऑलिव ऑयल के सेवन को बहुत लाभकारी पाया है। एक शोध में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि प्रतिदिन लगभग एक चम्मच जैतून के तेल का सेवन डिमेंशिया के कारण मृत्यु के जोखिम को लगभग 30 प्रतिशत तक कम कर सकती है। 28 वर्षों तक अमेरिका में 92,000 से अधिक वयस्कों के डेटा का अवलोकन करने पर पता चला कि ऑलिव ऑयल न सिर्फ अल्जाइमर से बचाने में लाभकारी है साथ ही इससे इन रोगों के कारण मौत के खतरे को भी कम कर सकते हैं।
नियमित व्यायाम की आदत बनाएं
हार्वर्ड के सेंटर फॉर अल्जाइमर रिसर्च एंड ट्रीटमेंट में क्लिनिकल ट्रायल के एसोसिएट मेडिकल डायरेक्टर डॉ. गैड मार्शल ने बताया कि व्यायाम की आदत बनाकर भी आप इस रोग से बचे रह सकते हैं। शारीरिक व्यायाम अल्जाइमर के विकास को रोकने या इसके शिकार लोगों में लक्षणों की प्रगति को धीमा करने में मदद करता है।
रोजाना 30 मिनट तक मध्यम तीव्रता वाले एरोबिक व्यायाम की आदत आपको इस रोग से बचाने में मददगार हो सकती है।
अच्छी नींद लेना भी जरूरी
डॉ. मार्शल कहते हैं, आहार और व्यायाम के साथ अल्जाइमर-डिमेंशिया से बचाव के लिए अच्छी नींद लेना भी जरूरी है। अध्ययनों में पाया गया है कि रोजाना अच्छी नींद लेना अल्जाइमर को रोकने में मदद कर सकती है। हर रात सात से आठ घंटे सोने का लक्ष्य रखें।
जिन लोगों को पहले से ही अल्जाइमर की शिकायत रही है वह नींद में सुधार के उपायों को अपनाकर अपनी जटिलताओं को कम कर सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।