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Asthma Risk: अगर माता-पिता को अस्थमा है, तो बच्चों को कैसे रखें सुरक्षित? डॉक्टर ने बताया

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 04 May 2026 11:56 AM IST
सार

अगर माता-पिता में से किसी एक को अस्थमा है, तो बच्चों में इसका खतरा सामान्य से कहीं ज्यादा हो जाता है। ऐसे में सवाल ये है कि बच्चों को इस खतरे से कैसे सुरक्षित किया जा सकता है? अस्थमा से बचाव के लिए क्या उपाय करने चाहिए?

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अस्थमा होने का जोखिम - फोटो : Amarujala.com/AI

सांस हमारे जीवन की डोर है और ऑक्सीजन प्राण वायु। यही कारण है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए श्वसन तंत्र का ठीक से काम करते रहना जरूरी हो जाता है। हालांकि लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के साथ पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण ने सांस की समस्याओं का जोखिम भी काफी बढ़ा दिया है। छोटे-छोटे बच्चे अस्थमा जैसी गंभीर समस्याओं का शिकार देखे जा रहे हैं।



अस्थमा को स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर समस्या मानते हैं। इस बीमारी में कई बार सांस लेना कठिन हो जाता है, खूब खांसी आती है और सांस फूलने की दिक्कत बनी रहती है। यही कारण है कि ऐसे मरीजों को हमेशा अपने साथ इमरजेंसी डिवाइस इनहेलर रखने की सलाह दी जाती है।

कई कारण है जो आपको अस्थमा का मरीज बना सकते हैं। इस बीमारी में आनुवांशिकता की भी बड़ी भूमिका है। अगर माता-पिता में से किसी एक को अस्थमा है, तो बच्चों में इसका खतरा बढ़ जाता है। अब सवाल ये है कि आनुवांशिक खतरे वाले बच्चों को इस बीमारी से कैसे बचाया जा सकता है?

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अस्थमा-सांस की समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com

बच्चों में अस्थमा का खतरा

अध्ययनों से पता चलता है कि अगर माता-पिता में से किसी एक को अस्थमा है तो बच्चे में इसका जोखिम लगभग 25-30% हो सकता है। वहीं अगर दोनों ही इस बीमारी का शिकार हैं तो यह खतरा बढ़कर 60-75% तक पहुंच जाता है। 

हालंकि इसका मतलब यह नहीं कि बच्चा निश्चित रूप से अस्थमा का शिकार होगा ही। शुरुआत में ही सही जानकारी और समय पर उठाए गए कदम बच्चों को न सिर्फ सांस की समस्याओं से बचा सकते हैं बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवन जीने में भी मदद करते हैं।

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वायु प्रदूषण से अस्थमा होने का खतरा - फोटो : Freepik.com

इन कारणों से भी होता है अस्थमा

साल 2014 के एक अध्ययन के अनुसार, अस्थमा होने के जोखिम में जेनेटिक कारणों का योगदान लगभग 70% होता है। हालांकि, अस्थमा का एकमात्र कारण जेनेटिक्स ही नहीं है।  ये बीमारी तब भी हो सकती है जब आपके परिवार में पहले से कोई इसका शिकार न रहा हो। कई पर्यावरणीय कारक भी किसी व्यक्ति में अस्थमा होने का कारण बन सकते हैं।
 

  • कुछ जीन ऐसे होते हैं जो शरीर को एलर्जी के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं, जिससे अस्थमा होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • प्रदूषण, धूम्रपान और एलर्जी भी इस खतरे को बढ़ा देते हैं। 
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सेकेंड हैंड स्मोकिंग का खतरा - फोटो : Adobe Stock

ये सावधानियां जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर माता-पिता को अस्थमा रहा है तो बच्चों को इसके खतरे से बचाने के लिए उन्हें प्रदूषण से दूर रखने, नियमित डॉक्टरी सलाह और ट्रिगर्स से बचाए रखना जरूरी है।
 

  • बच्चों को सेकंड हैंड स्मोक यानी कोई धूम्रपान कर रहा है तो उसके धुंए के संपर्क में आने से बचाएं। 
  • एलर्जी पैदा करने वाली चीजों जैसे धूल, पालतू जानवरों के रोएं, फफूंदी से भी बचाने के उपाय करें।
  • अस्थमा के जोखिम वाले बच्चों को इस बीमारी से बचाए रखने के लिए पहले से ही पीडियाट्रिशियन से मिलकर जरूरी सलाह ले लें।
  • बच्चों को नियमित व्यायाम कराएं। फिजिकल एक्टिविटी फेफड़ों को मजबूत बनाने में मदद करती है जिससे सांस की समस्याओं का खतरा कम होता है।
  • बच्चों का वजन कंट्रोल करें। अधिक वजन और मोटापा भी खतरे को बढ़ा सकते हैं।
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बच्चों को अस्थमा से कैसे बचाएं? - फोटो : Freepik.com

अस्थमा की रोकथाम के लिए करें उपाय
 

  • बच्चों को फ्लू और निमोनिया से बचाव के लिए वैक्सीनेशन कराएं। ये संक्रमण भी अस्थमा का कारण बन सकते हैं।
  • शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करते हैं, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
  • अस्थमा के खतरे वाले बच्चों में शुरुआती लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। शुरुआती चरणों में ही डॉक्टरी सलाह की मदद से आप इस गंभीर समस्या से बच्चों को सुरक्षित कर सकते हैं। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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