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Alert: अस्थमा का शिकार हैं तो हो जाइए सावधान, इन दिनों जरा सी भी लापरवाही बढ़ा सकती है आपकी मुसीबत

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 14 Apr 2026 08:22 PM IST
सार

गर्म मौसम अस्थमा रोगियों के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है। गर्मी और उमस की स्थिति वायुमार्ग के संकुचन का कारण बन सकती है। इससे अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। आप अपने जोखिमों को कैसे कम कर सकते हैं?

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Common Summer Asthma Triggers tips to Prevent Asthma attack se kaise bache
अस्थमा का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

अस्थमा, सांस की एक गंभीर समस्या है जिसका खतरा काफी तेजी से बढ़ा है, कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं? सांस की समस्याओं को आमतौर पर बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था हालांकि बड़ी संख्या में युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। खराब जीवनशैली के साथ बढ़ता प्रदूषण, धूल-मिट्टी, धूम्रपान जैसी आदतें फेफड़ों की सेहत पर गंभीर असर डाल रही हैं। 



देशभर में अब तापमान भी तेजी से बढ़ने लगा है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि मार्च 2026 रहा इतिहास का चौथा सबसे गर्म मार्च रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं बढ़ती गर्मी पहले से ही क्रॉनिक बीमारियों के शिकार लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है। खासतौर पर जिन्हें अस्थमा या सांसों की समस्या है उन्हें पहले से अलर्ट हो जाना चाहिए।

मार्च-अप्रैल के महीने में ही तापमान 35 डिग्री को पार कर रहा है। ऐसे में जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है उन्हें बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है।

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अस्थमा और सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com

क्या गर्मियां भी अस्थमा के मरीजों के लिए खतरनाक?

अस्थमा केवल सांस फूलने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह फेफड़ों की नलियों में सूजन पैदा कर उन्हें संकरा बना देती है, इससे ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है। अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचाना न जाए तो ये गंभीर स्थिति भी पैदा कर सकती है।

अक्सर लोग मानते हैं कि अस्थमा सिर्फ सर्दियों की बीमारी है, लेकिन गर्मियों में भी इसका खतरा काफी बढ़ जाता है। दरअसल, गर्म मौसम में हवा में प्रदूषण और एलर्जेंस की मात्रा बढ़ जाती है, जो सांस की नलियों को प्रभावित करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्मियों में अस्थमा के ट्रिगर होने का कारण- धूल भरी तेज हवा चलना, परागकण और वायु प्रदूषकों में वृद्धि हो सकती है।

इसके अलावा कुछ लोगों को हीटवेव के कारण भी लक्षणों के बिगड़ने की दिक्कत हो सकती है। गर्म हवा में सांस लेना कठिन हो सकता है जिसके कारण भी अस्थमा के ट्रिगर होने का जोखिम बढ़ जाता है। 


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सांस की समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com

कहीं ट्रिगर न हो जाए अस्थमा?

श्वसन रोगों के विशेषज्ञ बताते हैं, गर्म मौसम अस्थमा रोगियों के लिए दिक्कतें बढ़ा देता है। गर्मी और उमस की स्थिति वायुमार्ग के संकुचन का कारण बन सकती है। इससे अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। 
 

  • गर्मियों में एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल भी समस्या पैदा करता है। अगर एसी की सफाई न हो तो उसमें धूल, बैक्टीरिया और फंगस जमा हो जाते हैं, जो एलर्जी और अस्थमा अटैक को ट्रिगर कर सकते हैं।
  •  कई लोगों को गर्म हवा और डिहाइड्रेशन से भी सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। यही कारण है कि गर्मियों में अस्थमा मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
     
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अस्थमा अटैक से कैसे बचें? - फोटो : Adobe Stock

क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्म हवा, विशेषकर ह्यूमिडिटी में सांस लेना काफी कठिन होता है। सभी लोगों को इस मौसम में अस्थमा को ट्रिगर करने वाले कारकों से बचाव करते रहना चाहिए।
 

  • अगर आपको धूल, धुआं या परागकण से एलर्जी है तो बाहर निकलते समय मास्क पहनें और प्रदूषण वाले क्षेत्रों से बचें। घर की साफ-सफाई नियमित रखें ताकि धूल और फफूंदी जमा न हो।
  • गर्मियों में खुद को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है क्योंकि पानी की कमी से शरीर और श्वसन तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 
  • एसी का उपयोग करें तो उसकी सर्विस और सफाई समय-समय पर करवाएं। तेज धूप या अत्यधिक गर्मी में बाहर एक्सरसाइज करने से बचें क्योंकि इससे सांस फूल सकती है।
  • धूम्रपान बिल्कुल न करें और दूसरों के धुएं से भी दूरी रखें। 
  • नियमित व्यायाम, प्राणायाम और ब्रीदिंग एक्सरसाइज फेफड़ों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं। 
  • हेल्दी डाइट लें जिसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व शामिल हों।
     


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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