खराब लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने कई ऐसी बीमारियों का खतरा काफी आम कर दिया है, जिन्हें स्वास्थ्य विशेषज्ञ साइलेंट किलर मानते हैं। हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर उनमें से एक है, जिसका खतरा कम उम्र के लोगों में भी बढ़ता जा रहा है। अमर उजाला में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से हाई ब्लड प्रेशर देश में हर चौथे व्यक्ति को प्रभावित कर रहा है, सबसे चिंताजनक बात ये है कि ज्यादातर लोगों को पता भी नहीं होता है कि उन्हें ये बीमारी है।
Hypertension: देखने में हैं फिट भी फिर हार्ट-ब्रेन हो सकता है खतरे में, ये बीमारी कर देगी पूरे शरीर को डैमेज
World hypertension day 2026: हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। डॉक्टर 30 साल की उम्र से ही नियमित ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग की सलाह दे रहे हैं ताकि बीमारी को शुरुआती स्तर पर पकड़ा जा सके और समय रहते कंट्रोल किया जा सके।
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स्वस्थ दिखना, स्वस्थ होने की गारंटी नहीं
डॉक्टर खान बताते हैं, खराब खानपान, तनाव, नींद की कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करने, ज्यादा नमक खाने, शराब-धूम्रपान जैसी आदतों ने कम उम्र में ही इस बीमारी के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।
बाहर से स्वस्थ दिखना इस बात की गारंटी नहीं है कि आप अंदर से भी पूरी तरह स्वस्थ ही हों। यही वजह है कि अब 20-30 की उम्र से ही नियमित ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग की सलाह दी जा रही है ताकि बीमारी को शुरुआती स्तर पर पकड़ा जा सके और समय रहते कंट्रोल किया जा सके।
- युवा अक्सर देर रात तक जागते हैं और पर्याप्त नींद नहीं लेते, इससे हार्मोनल बैलेंस प्रभावित होती है। इसकी वजह से भी ब्लड प्रेशर की समस्या काफी बढ़ने लग गई है।
- लंबे समय तक लैपटॉप या मोबाइल के सामने बैठना, शारीरिक गतिविधि कम होना, जंक-प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन भी युवाओं के ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर रहा है।
लक्षण न दिखने से बीमारी का नहीं चलता है पता
डॉक्टर कहते हैं, हाइपरटेंशन की स्थिति में शरीर के भीतर रक्त वाहिकाओं पर लगातार दबाव बढ़ता रहता है। जिन लोगों के पारिवार में पहले से माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों को हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत है उन्हें खुद में इस बीमारी को लेकर और भी अलर्ट रहने की जरूरत होती है।
- हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते।
- कई लोग वर्षों तक हाई बीपी के साथ सामान्य जीवन जीते रहते हैं और उन्हें कोई गंभीर परेशानी महसूस नहीं होती। यही कारण कि ज्यादातर लोगों को अपनी बीमारी का पता नहीं चल पाता है।
- अगर समय रहते ब्लड प्रेशर की समस्या का पता न चल पाए और इसका इलाज न हो तो इससे हार्ट, किडनी, आंखों सहित ब्रेन से संबंधित गंभीर खतरे हो सकते हैं।
हार्ट से लेकर ब्रेन डैमेज का खतरा
हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर इसीलिए कहा जाता है क्योंकि ये शरीर को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
- हाई ब्लड प्रेशर के कारण दिल की सेहत पर सबसे ज्यादा असर होता है। जब वाहिकाओं पर खून का दबाव लगातार ज्यादा रहता है, तो दिल को खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिल की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। समय के साथ यह स्थिति हार्ट फेलियर, हार्ट अटैक और अनियमित धड़कनों का कारण बन सकती है।
- इसी तरह हाई ब्लड प्रेशर का ब्रेन पर भी खतरनाक असर होता है। लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में बीपी के कारण ब्लड क्लॉट बनने या नस फटने की स्थिति पैदा हो सकती है।
हाई ब्लड प्रेशर से कैसे बचें?
डॉक्टर कहते हैं, हाई ब्लड प्रेशर और इसके कारण होने वाली समस्याओं से बचाव के लिए जीवनशैली को ठीक रखना सबसे जरूरी है।
- रोज कम से कम 30 मिनट के व्यायाम, वॉकिंग, साइकिलिंग या योग करना हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
- बीपी कंट्रोल के लिए डाइट में नमक कम करना भी जरूरी है। इसके लिए प्रोसेस्ड फूड, पैकेट स्नैक्स और ज्यादा तला-भुना खाना कम करना चाहिए।
- फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और पोटैशियम से भरपूर चीजें ब्लड प्रेशर कंट्रोल में मदद कर सकती हैं।
- बीपी कंट्रोल के लिए स्ट्रेस कम करना भी जरूरी है। इसके लिए मेडिटेशन, पर्याप्त नींद लें और स्क्रीन टाइम कम करें।
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स्रोत:
Blood pressure and your brain/ How High Blood Pressure Can Lead to a Heart Attack
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।