ब्रेन स्ट्रोक, वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा रहा है। इससे हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। आंकड़ों से पता चलता है कि दुनियाभर में स्ट्रोक के कारण हर साल लगभग 65 से 73 लाख लोगों की जान चली जाती है।
स्ट्रोक डे: 80% मरीज स्ट्रोक के बाद अस्पताल पहुंचने में कर देते हैं देर, ये है जान जाने का सबसे बड़ा कारण
World Stroke Day 2026: विश्व स्ट्रोक दिवस पर विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के जोखिम और लक्षणों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल इसका खतरा बढ़ा सकते हैं। लक्षण दिखते ही अस्पताल पहुंचना गंभीर खतरे से बचाने वाला हो सकता है।
वर्षों से बढ़ रहा होता है स्ट्रोक का खतरा
न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर वी.के. सिंह बताते हैं, स्ट्रोक अचानक आता है, लेकिन इसके पीछे मौजूद कई जोखिम वर्षों पहले से ही शरीर में पनपने लगते हैं। परेशानी यह है कि इन जोखिमों का अक्सर पता नहीं चलता। वहीं, स्ट्रोक आने के बाद भी कई बार लोग इसके लक्षण पहचानने और अस्पताल पहुंचने में देर कर देते हैं। ऐसे में इलाज के लिए मिलने वाला कीमती समय निकल सकता है और लोगों की मौत हो जाती है।
स्ट्रोक के मरीजों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 73-80 प्रतिशत मरीज लक्षण शुरू होने के औसतन साढ़े चार घंटे से ज्यादा समय बाद अस्पताल पहुंचते हैं। इसकी एक बड़ी वजह स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में पर्याप्त जानकारी न होना था।
- स्ट्रोक का जोखिम अचानक नहीं बढ़ता। इसके पीछे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल का जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- ये बीमारियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के बनी रह सकती हैं। इसलिए खुद को स्वस्थ महसूस करने वाले युवाओं को भी इनसे सतर्क रहने की जरूरत है।
डायबिटीज-हाई बीपी बढ़ा रहे खतरा
आईसीएमआर-इंडियाबी के शोध के अनुसार, भारत में लगभग 35.5 प्रतिशत वयस्क हाई ब्लड प्रेशर, 87.3 प्रतिशत डिस्लिपिडेमिया और 11.4 प्रतिशत डायबिटीज से प्रभावित हैं।
- डिस्लिपिडेमिया का मतलब खून में कोलेस्ट्रॉल या दूसरे फैट का स्तर सामान्य से बाहर होना है। हाई ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ाता है, जबकि डायबिटीज और असामान्य कोलेस्ट्रॉल रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन स्थितियों से स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
स्ट्रोक के मामले में सबसे बड़ी चिंता क्या है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यहां दो महत्वपूर्ण चिंता सामने आती है।
- पहला, लोग स्ट्रोक होने से कई साल पहले से मौजूद जोखिमों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
- दूसरा, जब स्ट्रोक आता है, तो लक्षण पहचानने में देरी के कारण इलाज के लिए जरूरी समय बर्बाद हो रहा है।
युवाओं में स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल का असामान्य स्तर उन युवाओं के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है, जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ लगते हैं।
नियमित जांच और समय पर इलाज क्यों जरूरी है?
- नियमित हेल्थ चेकअप, डॉक्टर से सलाह और कार्यस्थल पर आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारी किस तरह स्ट्रोक के जोखिम और इलाज में होने वाली देरी को कम करने में मदद कर सकती है? ये सभी लोगों के लिए जानना जरूरी है।
- चेहरे में टेढ़ापन के साथ आवाज में लड़खड़ाहट जैसी स्थितियां गंभीर संकेत हो सकती हैं जिसपर समय रहते ध्यान देना और इलाज करना बहुत जरूरी है।
कई बार चेहरे का एक तरफ झुकने, हाथों-पैरों में अचानक कमजोरी आने, बोलने में लड़खड़ाहट या शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन लोग इन्हें थकान, कमजोरी या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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