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नॉर्मल बीपी और कंट्रोल शुगर के बावजूद क्यों आ सकता है ब्रेन स्ट्रोक? न्यूरोलॉजिस्ट से समझें वजह
Thu, 29 Oct 2026 04:18 PM IST
श्रुति गौड़
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Thu, 29 Oct 2026 04:18 PM IST
सार
World Stroke Day 2026: विश्व स्ट्रोक दिवस के मौके पर समझें कि दिल की धड़कन में गड़बड़ी, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, रक्त वाहिकाओं की समस्याएं और खून के थक्के स्ट्रोक का खतरा कैसे बढ़ा सकते हैं।
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नॉर्मल बीपी और कंट्रोल शुगर के बावजूद क्यों आ सकता है ब्रेन स्ट्रोक?
- फोटो : AI
World Stroke Day 2026: अक्सर माना जाता है कि अगर ब्लड प्रेशर सामान्य है, ब्लड शुगर कंट्रोल में है और आप नियमित एक्सरसाइज करते हैं, तो ब्रेन स्ट्रोक का खतरा नहीं होगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। स्वस्थ जीवनशैली स्ट्रोक का जोखिम कम कर सकती है, मगर इसे पूरी तरह खत्म नहीं करती। कई बार फिट दिखने वाले लोगों को भी ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है।
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नॉर्मल बीपी और कंट्रोल शुगर के बावजूद क्यों आ सकता है ब्रेन स्ट्रोक?
- फोटो : AI
सामान्य BP और कंट्रोल शुगर के बावजूद क्यों आता है ब्रेन स्ट्रोक?
डॉ. विनीत बंगा के साझा किए गए विवरण के अनुसार, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना स्ट्रोक का जोखिम कम करने में मदद करता है। हालांकि, स्ट्रोक के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
1. दिल की धड़कन का अनियमित होना
दिल की धड़कन से जुड़ी समस्या, खासकर एट्रियल फिब्रिलेशन (Atrial Fibrillation), दिल में खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ा सकती है। अगर ऐसा थक्का दिमाग तक पहुंचकर रक्त प्रवाह को रोक दे, तो इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है। कई लोगों को दिल की धड़कन में इस गड़बड़ी का पता भी नहीं चलता।
डॉ. विनीत बंगा के साझा किए गए विवरण के अनुसार, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना स्ट्रोक का जोखिम कम करने में मदद करता है। हालांकि, स्ट्रोक के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
1. दिल की धड़कन का अनियमित होना
दिल की धड़कन से जुड़ी समस्या, खासकर एट्रियल फिब्रिलेशन (Atrial Fibrillation), दिल में खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ा सकती है। अगर ऐसा थक्का दिमाग तक पहुंचकर रक्त प्रवाह को रोक दे, तो इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है। कई लोगों को दिल की धड़कन में इस गड़बड़ी का पता भी नहीं चलता।
नॉर्मल बीपी और कंट्रोल शुगर के बावजूद क्यों आ सकता है ब्रेन स्ट्रोक?
- फोटो : Adobe Stock
2. बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल
खून में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल अधिक होने से धमनियों में प्लाक जमा हो सकता है। इससे दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नसें संकरी हो सकती हैं या उनमें रुकावट पैदा हो सकती है। इसलिए सामान्य बीपी होने पर भी कोलेस्ट्रॉल की जांच और नियंत्रण जरूरी है।
3. दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नसों में समस्या
गर्दन या दिमाग की रक्त वाहिकाओं में संकुचन, चोट के कारण नस की अंदरूनी परत फटना (आर्टेरियल डिसेक्शन) या दूसरी असामान्यताएं स्ट्रोक का कारण बन सकती हैं। कुछ समस्याएं बिना स्पष्ट लक्षणों के भी मौजूद हो सकती हैं।
खून में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल अधिक होने से धमनियों में प्लाक जमा हो सकता है। इससे दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नसें संकरी हो सकती हैं या उनमें रुकावट पैदा हो सकती है। इसलिए सामान्य बीपी होने पर भी कोलेस्ट्रॉल की जांच और नियंत्रण जरूरी है।
3. दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नसों में समस्या
गर्दन या दिमाग की रक्त वाहिकाओं में संकुचन, चोट के कारण नस की अंदरूनी परत फटना (आर्टेरियल डिसेक्शन) या दूसरी असामान्यताएं स्ट्रोक का कारण बन सकती हैं। कुछ समस्याएं बिना स्पष्ट लक्षणों के भी मौजूद हो सकती हैं।
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नॉर्मल बीपी और कंट्रोल शुगर के बावजूद क्यों आ सकता है ब्रेन स्ट्रोक?
- फोटो : Freepik.com
4. खून का जरूरत से ज्यादा थक्का बनना
कुछ आनुवंशिक या अन्य चिकित्सकीय स्थितियों में खून के थक्के बनने की संभावना बढ़ जाती है। अगर थक्का दिमाग की किसी रक्त वाहिका में रुकावट पैदा करे, तो स्ट्रोक हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार जांच की सलाह देते हैं।
5. उम्र, धूम्रपान और पारिवारिक इतिहास
उम्र बढ़ना, धूम्रपान करना और परिवार में स्ट्रोक का इतिहास होना भी जोखिम को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, कुछ दुर्लभ बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।
कुछ आनुवंशिक या अन्य चिकित्सकीय स्थितियों में खून के थक्के बनने की संभावना बढ़ जाती है। अगर थक्का दिमाग की किसी रक्त वाहिका में रुकावट पैदा करे, तो स्ट्रोक हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार जांच की सलाह देते हैं।
5. उम्र, धूम्रपान और पारिवारिक इतिहास
उम्र बढ़ना, धूम्रपान करना और परिवार में स्ट्रोक का इतिहास होना भी जोखिम को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, कुछ दुर्लभ बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।
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कभी-कभी स्ट्रोक का कारण पता नहीं चलता
कुछ मरीजों में विस्तृत जांच के बावजूद स्ट्रोक का स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता। इसे क्रिप्टोजेनिक स्ट्रोक कहा जा सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर दिल, रक्त वाहिकाओं और खून के थक्के बनने से संबंधित संभावित कारणों की जांच कर सकते हैं।
कुछ मरीजों में विस्तृत जांच के बावजूद स्ट्रोक का स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता। इसे क्रिप्टोजेनिक स्ट्रोक कहा जा सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर दिल, रक्त वाहिकाओं और खून के थक्के बनने से संबंधित संभावित कारणों की जांच कर सकते हैं।