अगर आप भी इस मौसम का लुत्फ उठाने के लिए राजा-रजवाड़ों के शहर राजस्थान का रूख करने की सोच रहे हैं तो सतर्क हो जाइए। यहां की राजधानी जयपुर में जीका नाम के एक वायरस का संक्रमण फैला हुआ है। जीका वायरस डेंगू की तरह एक मच्छर से ही फैलता है। इस रोग की वजह से गर्भवती महिलाओं के पैदा होने वाले बच्चों को बड़ा नुकसान हो सकता है। जिसकी वजह से होने वाले बच्चे का सिर छोटा होने के कारण उसके दिमागी विकास में रुकावट हो सकती है। आइए जानते हैं इस बीमारी के लक्षण और बचने के उपाय।
जीका वायरस जयपुर में दे चुका है दस्तक, बचने के लिए बरतें ये 5 सावधानियां
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जीका वायरस डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की ही तरह मच्छरों से फैलता है। यह एक प्रकार का एडीज मच्छर ही है, जो दिन में सक्रिय रहते हैं। अगर यह मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काट लेता है, जिसके खून में वायरस मौजूद है, तो यह किसी अन्य व्यक्ति को काटकर वायरस फैला सकता है। मच्छरों के अलावा असुरक्षित शारीरिक संबंध और संक्रमित खून से भी जीका बुखार या वायरस फैलता है।
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जीका वायरस से संक्रमित व्यक्ति को जॉइंट पेन, आंखें लाल होना, उल्टी आना, बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके शिकार मरीजों को कंप्लीट बेड रेस्ट लेना चाहिए।
-घर में मच्छर न पनपने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
-जो महिलाएं लंबे ट्रैवल से लौटी हैं खासतौर से उन जगहों से जहां वायरस फैला हुआ है, तो अगले 8 सप्ताह तक गर्भधारण करने से बचें।
-घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली जरूरी लगवाएं, जाली वाले दरवाजे हमेशा बंद रखें।
-अगर आपको डायबीटीज, हाइपरटेंशन, इम्यूनिटी डिसऑर्डर जैसी दिक्कतें हैं तो यात्रा करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
-यात्रा से आने के दो सप्ताह के अंदर अगर आपको हल्का बुखार होता है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, जीका वायरस के संक्रमण को रोकने का सबसे अच्छा उपाय है मच्छरों की रोकथाम।
2. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढककर रखने के साथ हल्के रंग के कपड़े पहनें।
3- मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए अपने घर के आसपास गमले, बाल्टी, कूलर आदि में भरा पानी निकाल दें।
4- बुखार, गले में खराश, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल होने जैसे लक्षण नजर आने पर अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन और भरपूर आराम करें।
5- जीका वायरस का फिलहाल कोई टीका उपलब्ध नहीं है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि स्थिति में सुधार नहीं होने पर फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए।