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Lohri 2021: क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार? पढ़िए पौराणिक कथाएं और लोकगीत

Wed, 13 Jan 2021 03:49 PM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश जोशी Updated Wed, 13 Jan 2021 03:49 PM IST
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लोहड़ी 2021 - फोटो : social media

आज देशभर में लोहड़ी के पर्व की धूम मची हुई है। लोहड़ी का पावन पर्व पंजाब और हरियाणा में काफी प्रचलित है। इस पावन दिन लोग फसलों की अच्छी पैदावार के लिए भगवान का धन्यवाद करते हैं। लोहड़ी के पर्व में रात के समय लोग अपने घरों के बाहर आग जलाते हैं। इस अग्नि में लोग मक्के और तील से बनी चीजों को अर्पित करते हैं। इस पावन दिन लोग पारंपरिक वेशभूषा धारण कर लोक नृत्य और लोक गीत गाते हैं।

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lohri 2021 - फोटो : अमर उजाला
  • लोहड़ी लोकगीत

सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो,
दुल्ला भट्ठी वाला हो, दुल्ले दी धी व्याही हो,
सेर शक्कर पाई हो, कुड़ी दे जेबे पाई हो,
कुड़ी दा लाल पटाका हो, कुड़ी दा सालू पाटा हो,
सालू कौन समेटे हो, चाचे चूरी कुट्टी हो,
जमीदारां लुट्टी हो, जमीदारां सदाए हो,
गिन-गिन पोले लाए हो, इक पोला घट गया,
ज़मींदार वोहटी ले के नस गया, इक पोला होर आया,
ज़मींदार वोहटी ले के दौड़ आया,
सिपाही फेर के लै गया, सिपाही नूं मारी इट्ट, भावें रो ते भावें पिट्ट,
साहनूं दे लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी।

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lohri 2021 - फोटो : अमर उजाला

धार्मिक मान्यता के अनुसार दक्ष ने भगवान शिव का तिरस्कार किया और भोलेनाथ को यज्ञ का आमंत्रण नहीं भेजा। अपने पति की उपेक्षा देखकर माता सती ने अग्निकुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी। तब से ही ऐसा माना जाता है कि प्रायश्चित के तौर पर लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है।

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lohri 2021 - फोटो : social media

एक अन्य धार्मिक कथा के अनुसार गोकुलवासी मकर संक्रांति की तैयारी में लगे थे और तब कंस बाल कृष्ण को मारने के लिए साजिश रच रहा था। कंस ने भगवान कृष्ण को मारने के लिए लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल में भेजा था। भगवान कृष्ण ने खेल-खेल में ही लोहिता राक्षसी को मार दिया। इस खुशी में ही मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी का पावन पर्व मनाया जाता है।

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lohri 2021 - फोटो : अमर उजाला
  • लोहड़ी के दिन सुनते हैं दुल्ला भट्टी की कहानी

लोक मान्यताओं के अनुसार, मुगल राजाओं के शासन काल में अकबर के समय में दुल्ला भट्टी नाम का एक आदमी पंजाब में रहता था। दुल्ला भट्टी बहादुर योद्धा था। वो अमीर लोगों से धन लूटता था और गरीब लोगों की मदद करता था। हिंदू और सिख लड़कियों पर मुगलों और जमीदारों की बुरी नजर रहती थी और उनको वो अगवा कर लिया करते थे। दुल्ला भट्टी हिंदू और सिख लड़कियों के विवाह में मदद करता था। मुगलों द्वारा सताई गईं लड़कियों का कन्यादान भी वो स्वयं करता था। अकबर की फौज दुल्ला भट्टी को डाकू मानती थी। उस समय संदलबार नाम की एक जगह पर गरीब घर की लड़कियों को अमीरों को बेचा जाता था। यह जगह अब पाकिस्तान में है। दुल्ला भट्टी ने व्यापारियों के चंगुल से लड़कियों को बचाकर उनकी शादी करवाई। तभी से लोहड़ी के पावन दिन दुल्ला भट्टी की कहानी सुनने का प्रचलन शुरू हुआ।

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