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आचार्य रजनीश जन्मदिन विशेषः जब रोज श्मशान जाने वाले ओशो मंदिर में करते रहे मौत का इंतजार

Wed, 11 Dec 2019 01:56 PM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Wed, 11 Dec 2019 01:56 PM IST
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osho quotes on death when osho went to the crematorium every day
- फोटो : Social Media

ओशो एक ऐसा नाम है जिसने जहां एक ओर सम्पूर्ण विश्व के रहस्यवादियों, दार्शनिकों और धार्मिक विचारधाराओं को नया अर्थ दिया। आध्यात्म और संन्यास की नई परिभाषा गढ़ी। ओशो फिलॉसफी के टीचर थे वो अपने विचारों से धर्म को चुनौती देते हैं। मध्य प्रदेश के गांव कुछवाड़ा में 11 दिसंबर को जन्मे ओशो का पारिवारिक नाम रजनीश चंद्र मोहन था। 1975 में ओशो संस्कृत के लेक्चरर के तौर पर रायपुर विश्वविद्यालय में पढ़ाने लगे। वहां उनके विचारों को युवाओं के लिए अच्छा न मानते हुए उनका ट्रांसफर कर दिया गया। जिसके बाद अगले ही साल उन्होंने जबलपुर यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र के प्रवक्ता के रूप में काम करना शुरू कर दिया। 



बचपन से ही खुद को नास्तिक विचारधारा से जोड़ते आए ओशो ने एक नए दर्शन को जन्म दिया। उनके विचार विवादों में आते रहे। 1970 के वक्त में ओशो मुंबई में रुके और अपने शिष्यों को 'नव संन्यास' की शिक्षा दी। शुरूआत में उन्होंने आध्यात्मिक मार्गदर्शके का तौर पर काम करना शुरू किया। 1974 के वक्त में पूना आए और अपने आश्रम की स्थापना की। उनके अनुयायियों में विदेशियों की संख्या बढ़ने लगी। 1980 के वक्त में ओशो अमेरिका चले गए और वहां सन्यासियों। वहां सन्यासियों ने रजनीशपुरम की स्थापना की।
 

osho quotes on death when osho went to the crematorium every day
- फोटो : social media

अमेरिका में रहते वक्त उन पर 35 आरोप लगे, जिसमें जालसाजी, अमेरिका की नागरिकता पाने के उद्देश्य से अपने अनुयायियों को वहां शादी के लिए प्रेरित करना शामिल हैं। उन्हें इसके एवज में 4 लाख अमेरिकी डॉलर की सजा भुगती पड़ी। इसके साथ ही 5 साल तक देश न वापस आने की हिदायत के साथ उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ा।

अमेरिका से जब आचार्य रजनीश जब लौटे तो वे दोबारा पुणे आ गए। यहां आकर उन्होंने 'ओशो' नाम ग्रहण किया। हालांकि उन्होने काठमांडू और ग्रीस की यात्रा की, लेकिन किसी भी देश ने उन्हें रहने की इजाजत नहीं दी। साल 1986 में ओशो पुणे में ही बस गए। 19 जनवरी 1990 को ओशो रजनीश की दिल का दौरा पड़ने की वजह से मौत हो गई।

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- फोटो : social media
ओशो के बारे में ये हैं 7 अनुसनी बातें
  • ओशो के बारे में कई बातें ऐसी है जो बेहद रोचक हैं। जन्म के वक्त की एक बात बेहत प्रचलित है। लोग कहते हैं कि जब ओशो पैदा हुए थे तो वो तीन दिन तक न तो हंसे थे और न रोए थे।
  • शुरू से कुछ नया जानने की इच्छा ओशो के अंदर बेहद प्रबल थी। ऐसा कहा जाता है कि ओशो 12 साल की उम्र में रात के वक्त श्मशान जाते थे। वो ये पता करना चाहते थे कि आखिर इंसान मरने के बाद कहां जाता है।
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- फोटो : social media
  • कहा जाता है कि ज्योतिषियों ने बताया था कि 21 साल की उम्र तक हर सातवें वर्ष में उनकी मृत्यु का योग है। ओशो जब पता चला तो वो 14 साल की उम्र में सात दिनों तक मंदिर में मौत के इंतजार में लेटे रहे। उक्ति है कि इस दौरान वहां एक सांप आया, लेकिन वो भी वापस चला गया।
  • ओशो के बचपन के बारे में एक दिलचस्प बात और कही जाती है कि वो नदी में नहाते वक्त अपने दोस्तों को पानी में डुबो देते थे। जिसकी वजह से उनका अपने मित्रों से बहुत झगड़ा होता था। वो कहते थे कि “मैं यह देखना चाहता हूँ की मरना क्या होता है”।
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- फोटो : social media
एक दिन में पढ़ लेते थे तीन किताबें, हाथी पर बैठकर गए थे स्कूल
  • ओशो के बारे में ये बात प्रचलन में है कि वो बेहद जिद्दी स्वभाग के थे। शुरू से उनका झुकाव विलासिता पूर्ण जीवन की ओर रहा। एक बार उन्होंने ये जिद पकड़ ली कि हाथी पर बैठकर ही स्कूल जाएंगे। ओशो की जिद के आगे उनके परिवार वाले भी हार गए और उन्हें हाथी मंगाना पड़ा था। जिसपर बैठकर वो स्कूल गए।
  • ओशो के बारे में एक और बात प्रचलित है कि वो पढ़ने लिखने के बेहद शौकीन थे। किशोरावस्था में ही वे एक दिन में तीन-तीन किताबें पढ़ लेते थे। उन्हें जर्मनी, मार्क्स और भारतीय दर्शन से संबंधित किताबें पढ़ना सबसे ज्यादा पसंद था।
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