किशोरावस्था की उम्र आते ही बच्चों के साथ ही माता-पिता को भी बहुत सारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, इस उम्र में आते ही बच्चों को लगता है कि वो बड़े हो गए हैं और हर फैसले खुद से ले सकते हैं। वहीं उनमे हो रहे शारीरिक और मानसिक बदलावों की वजह से वो चिड़चिड़े से हो जाते हैं। ऐसे में अगर माता पिता के साथ विचारों का मतभेद होता है तो बच्चे अभिभावकों की बात सुनना पसंद नहीं करते। ऐसे में जरूरत है कि माता पिता धैर्य से परवरिश करें।
Parenting Tips: टीनएज बच्चों के अभिभावक हैं तो इस तरह से करें परवरिश
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अगर बच्चे आपकी बात नहीं सुनते तो चिल्लाएं नहीं। इससे बच्चे और ज्यादा जिद्दी हो जाते हैं। बच्चों को समझाने के लिए पहले खुद शांत होना सीखें। शांत व्यवहार के साथ बच्चों से उनकी परेशानी के बारे में पूछे और उन्हें कुछ बातें सिखाएं। ऐसे में वो जल्दी ही आपकी बातों को सुनकर अमल में लाएंगे।
घर में अनुशासन बनाए रखने और बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए जरूरी है कि घर में कुछ नियम बनाएं। साथ ही बच्चों के लिए कुछ अतिरिक्त नियम बनाएं जिसे सख्ती से लागू करवाएं। साथ ही इन नियमों के कारण भी बच्चों को समझाए। जिससे कि वो बिना वजह की बहस ना करें।
अगर घर में लागू नियम को कोई तोड़ता है तो उसे सजा भी जरूर दें। अगर वो दोस्तों के साथ देर रात तक घूमता है और घर लौट कर बहाने बनाता है। तो सजा के तौर पर अगली बार से उसके शाम के बाद दोस्तों से मिलने पर पाबंदी लगाएं।
टीन एज बच्चों के साथ सख्त व्यवहार के साथ दोस्ताना रवैया भी रखें। उनकी बातों को ध्यान से सुनें। बच्चों को समझने के साथ ही अपनी बातों को भी समझाएं। उदाहरण देकर समझाने से बच्चे बातों को जल्दी समझने की कोशिश करेंगे।