ऐसा हो सकता है कि किसी औरत ने रेप की शिकायत की हो और उसके मामले में कार्रवाई भी हुई हो जिसके बाद उसे न्याय भी मिल गया हो, लेकिन ऐसे मामलों की भी कमी नहीं है, जिनमें जब किसी औरत ने अपने साथ हुए रेप की शिकायत की तो उसकी जिंदगी हमेशा के लिए तबाह हो गई। अगर आपको ये लगता है कि ऐसा सिर्फ भारत में होता है, तो ऐसा नहीं है।
यौन हिंसा की शिकायत की क्या कीमत चुकाती हैं महिलाएं?
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#MeToo
इन सबका एक नतीजा ये हुआ कि #MeToo जैसे आंदोलन पूरी दुनिया में शुरू हो गए। द रेपिस्ट इज यू जैसे गाने पूरी दुनिया में छा गए। लेकिन सिर्फ जागरुकता ही पर्याप्त नहीं है। पीड़ित को न्याय भी तो मिले। रेप पीड़ितों के लिए अभियान चलाने वालों का कहना है कि अपनी शिकायतें लेकर आने वाली महिलाओं की संख्या निश्चित तौर पर बढ़ी है लेकिन इससे किसी भी तरह रेप के मामले नहीं घटे हैं।
अकेले ब्रिटेन में साल 2019 के आंकड़े अपने निम्नतम स्तर पर रहे। इंग्लैंड और वेल्स में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए रेप केस के हर सौ मामलों में से सिर्फ तीन मामलों में ही अभियुक्तों को सजा मिली। जबकि 10 साल पहले रेप के अभियुक्त को कोर्ट से सजा मिलना आज की तुलना में काफी आसान था।
साइप्रस का न्याय और शर्मिंदगी
इसी सप्ताह एक बेहद घबराई-परेशान ब्रिटिश किशोरी अपने घर लौटी। साइप्रस की कानूनी कार्रवाई के चलते यह किशोरी बीते छह महीने से हिरसात में थी।
"साइप्रस का न्याय- धिक्कार है! महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली कार्यकर्ताओं के लिए यह नारा बन गया। इन प्रदर्शनों में वो औरतें भी शामिल थीं जो इसरायल से थीं, वे कोर्ट के बाहर खड़ी होकर ये नारे बार-बार दोहरा रही थीं।"
वे उस किशोरी के समर्थन में खड़ी थीं जिसे रेप का झूठा आरोप लगाने को लेकर सजा सुनाई गई थी। साइप्रस के सांसद कोउकोउमा ने बीबीसी से कहा "कुछ लोग कह सकते हैं कि यह राहत की खबर हो सकती है, उस लड़की के लिए भी।"
"लेकिन इस सारे मामले की कार्रवाई और इस सामले को जिस तरह से आगे बढ़ाया गया वो बिल्कुल भी ठीक नहीं था। बहुत से सवाल थे जिनका जवाब मिलना बाकी था।"
यह केस जुलाई 2019 का है। जब एक किशोरी ने पुलिस से कहा कि 12 इसरायली मर्द उसके कमरे में धमक पड़े। उस वक्त वो उनके एक दोस्त के साथ आपसी सहमति से सेक्स कर रही थी। उसका कहना था कि वो कमरे में धमक पड़े और उन्होंने उसका रेप किया। उन मर्दों को गिरफ्तार किया गया लेकिन गवाही की जरूरत नहीं समझी गई।
दावे पीछे रह गए
हालांकि उस किशोरी से घंटों तक पूछताछ की गई और जिस वक्त पुलिस उससे पूछताछ कर रही थी वहां उसके साथ कोई वकील नहीं था। अंत में वह अपने ही किए दावों से पीछे हट गई। सभी 12 इसरायली आजाद कर दिए गए और वे घर लौट गए लेकिन इस लड़की को जेल भेज दिया गया। उनकी मां का कहना था कि उनकी बेटी अपने साथ हुए रेप की शिकायत कराने बतौर पीड़ित गई थी लेकिन...
उनकी मां ने बीबीसी से कहा, "उससे एक दूसरा बयान दर्ज कराने को कहा गया और उसने बताया कि उसे इस झूठा बयान को देने के लिए मजबूर किया गया। उसने मुझे बताया कि जिस वक़्त ये सारा कुछ हो रहा था वो बुरी तरह से डर हुई थी।"
गिरफ्तारी का डर
'उन्होंने कहा कि वो उसे गिरफ्तार कर लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर उसने इस नए बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए तो वे उसके ख़िलाफ अंतरराष्ट्रीय वारंट लेकर आएंगे और उसे गिरफ़्तार कर लेंगे। और अगर वो उनके दिए बयान पर हस्ताक्षर कर देती है तो वे उसे जाने देंगे। और उस समय वो सिर्फ और सिर्फ वहां से निकलना चाहती थी।" उस किशोरी की वकील लेविस पावर क्यूसी ने बताया, "यह बेहद परेशान करने वाला और चिंता में डालने वाला था।"
"वो करीब साढ़े चार हफ्ते के लिए हिरासत में थी। वो एक ऐसी जेल में थी जहां पहले से ही आठ औरतें थीं। उसकी जमानत की शर्ते भी बेहद कठोर थीं।"
लेकिन अब वो आजाद है और अपने घर जा सकती है लेकिन उसका नाम पुलिस की लिस्ट में आ चुका है। उनकी मां का कहना है कि उनकी बेटी अब भी उस बुरे वक़्त के सदमे से बाहर नहीं आ सकी है। किशोरी का कहना है कि पुलिस ने उसे उसकी बात से पलटने के लिए मजबूर किया। उस पर झूठ बोलने के लिए दबाव डाला।
उनकी वकील का कहना है कि उनकी लीगल टीम यूरोपियन कोर्ट ऑफ़ ह्यूमन राइट्स जाने के लिए विचार कर रही है। "यह केस अभी तक खत्म नहीं हुआ है।"