शिमला, कुल्लू, मनाली या फिर लहराते समुद्र को देखने की चाह तो हर किसी को होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का हर एक कोना बेहद खूबसूरत है। और इस खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम किया है इंसानों ने। ऐसा ही एक राज्य है मध्य प्रदेश, जहां पर बहुत से खूबसूरत नजारे हैं जिन्हें देखने के लिए लोग आते हैं। हांलाकि पहले यहां पर आने वाले सैलानियों की संख्या कुछ कम थी लेकिन पिछले साल से मध्य प्रदेश के टूरिज्म में तेजी से विकास हुआ है। तो अगर आप इस इस राज्य की खूबसूरती को देखने का मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं तो नवंबर का मौसम सबसे मुफीद है। तो चलिए जानें इस खूबसूरत राज्य में क्या है घूमने के लिए।
मध्यप्रदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं तो इन जगहों पर जाना ना भूलें, मिलेगा अद्भुत खूबसूरती का खजाना
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सबसे पुरानी मानव निर्मित झील बनी है जिसका नाम है उप्पेर या अपर झील। इसे बड़ा तालाब के नाम से भी जाना जाता है। कोलंस नदी के ऊपर बने बांध के नजदीक बनी ये झील भारत की कुछ चुनिंदा सुंदर झीलों में से एक है।
मध्य प्रदेश में बहुत सारे नेशनल पार्क है जिनमें आप जंगली जीवों को करीब से देख सकते हैं। इन नेशनल पार्क में से कान्हा नेशनल पार्क और बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बढ़ते हुए टाइगर के कारण ज्यादा मशहूर हैं। इन नेशनल पार्क में बड़े ही आसानी से टाइगर को देखा जा सकता है।
मध्य प्रदेश की छिपी हुई खूबसूरती में से एक है भेड़ा घाट। जिसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। सफेद संगमरमर के पहाड़ों को जब आप करीब से देखते हैं तो आंखों को इस अद्भुत नजारे पर यकीन ही नहीं होता है। पूरे देश में इस मार्बल रॉक से मार्बल सप्लाई किया जाता है। 8 किमी के एरिया में फैला ये पहाड़ा देखने में बेहद खूबसूरत लगता है। इन पहाड़ों को करीब से देखने के लिए बोट राइड और केबल कार राइड की भी व्यवस्था की गई है। यहां पर केवल सफेद मार्बल ही नहीं बल्कि कुछ काले और कुछ रंग-बिरंगे मार्बल भी दिख जाते हैं। जिनको सूर्य की चमकती रोशनी में देखना दिलचस्प है। भेड़ाघाट जबलपुर से करीब 25 किमी दूर बसा एक छोटा सा जिला है।
भेड़ाघाट के करीब ही बना हुआ है यह बेहद खूबसूरत झरना। जिसे देखने के बाद शरीर में एक सिहरन सी मच जाती है। करीब 30 मीटर ऊंचाई से गिरते झरने को देखने के लिए केवल सैलानी ही नहीं बल्कि स्थानीय पर्यटक भी आते हैं। 30 मीटर की ऊंचाई से गिरते पानी का नजारा धुआं जैसा नजर आने के कारण ही इस झरने का नाम धुआंधार रखा गया है।