जीवन के एक पड़ाव के बाद कुछ धार्मिक जगहों के दर्शन करना हर किसी की चाह होती है। ऐसे में अगर आप माता-पिता को किसी पवित्र धाम की यात्रा करवाते हैं तो वो बहुत खुश हो जाएंगे। तो चलिए आज हम आपको बताने जा रहें है कृष्ण की पवित्र कर्म नगरी के बारे में जिसको साक्षात ब्रह्मा का द्वार कहा जाता है। लेकिन कृष्ण की नगरी मथुरा या वृंदावन की बात हम नहीं कर रहें हैं। तो चलिए जानें कि कृष्ण की कर्म नगरी में क्या है घूमने के लिए।
सात प्राचीन शहरों में से एक महाभारत काल की नगरी, जहां आज भी मिलते हैं उस समय के प्रमाण
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द्वारका को कृष्ण की कर्म नगरी के नाम से भी जाना जाता है। इसका नाम द्वारका का अर्थ है ब्रह्मा का द्वार। ये नगर सात पुराने शहरों में से एक है। इसे चार धामों के नाम से भी जाना जाता है। द्वारका के इतने सारे धार्मिक महत्व के कारण ही लोग द्वारका दर्शन के लिए जाना चाहते हैं।
द्वारकाधीश मंदिर द्वारका का मुख्य मंदिर है जिसे जगत मंदिर भी कहा जाता है। कृष्ण की राजधानी रह चुकी इस नगरी में द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण कृष्ण के पौत्र वज्रनाभ ने कराए थे। इस मंदिर के प्रांगण में बहुत सी सुंदर और कलात्मक संरचनाओं का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था।
बारदा पहाड़ी की तलहटी में एक छोटा सा गांव है जिसे घुमली कहा जाता है। जिसकी स्थापना 7 वीं शताब्दी में जेठवा साल कुमार ने की थी। गुजरात में मंदिरों का शहर कहलाने के पहले यह स्थान जेठवा राजवंश की राजधानी था। इनमें से सोलंकी राजवंश का नवलखा मंदिर प्रसिद्ध है जो गुजरात के सबसे पुराने सूर्य मंदिर के रूप में जाना जाता है। द्वारका में एक बावड़ी भी है जिसे विकई वाव कहा जाता है।
शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग। यहां पर दूर-दूर से शिव के भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसके साथ ही ये एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है।