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MP News: घर का बोझ उठाने कुली बनी दुर्गा, जिस स्टेशन पर सामान उठाया, अब वहीं की शादी, हल्दी लगाने पहुंचे सांसद
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, बैतूल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 01 Mar 2024 05:44 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के बैतूल की एक शादी चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां की एकमात्र कुली की शादी खास रही। रेलवे प्रतीक्षालय पर उसने फेरे लिए और रेलवे स्टाफ ने भी रस्में निभाने में मदद की।
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बैतूल की एकमात्र महिला कुली ने रेलवे स्टेशन पर की शादी
- फोटो : अमर उजाला
मध्यप्रदेश के बैतूल की एक शादी चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां की एकमात्र कुली की शादी खास रही। रेलवे प्रतीक्षालय पर उसने फेरे लिए और रेलवे स्टाफ ने भी रस्में निभाने में मदद की। सांसद दुल्हन को हल्दी लगाने पहुंचे तो विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने शादी में उत्साह से भाग लिया।
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बैतूल की महिला कुली दुर्गा और उसका दूल्हा सुरेश
- फोटो : सोशल मीडिया
29 फरवरी को दुर्गा और सुरेश की शादी रेलवे स्टेशन पर स्थित कल्याण केंद्र में धूमधाम से हुई। दोनों ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के सामने शादी की। विधायक हेमंत खंडेलवाल और भाजपा जिला अध्यक्ष आदित्य शुक्ला भी मेहमान बने और उन्होंने वर वधू को आशीर्वाद दिया।
संघर्ष भरा रहा दुर्गा का जीवन
बता दें कि महिला कुली दुर्गा बोरकर की पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं है। दरअसल दुर्गा के पिता भी रेलवे स्टेशन पर कुली का काम किया करते थे। जिन पर तीन बेटियों के पालन पोषण का जिम्मा था। बढ़ते समय के साथ उनके स्वास्थ्य ने उनका साथ नहीं दिया और उनका काम बंद हो गया। इसके बाद परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी दुर्गा ने अपने जिम्मे ले ली। दुर्गा के लिए सफर आसान तो नहीं था, सबसे पहले उसे अपने पिता का बिल्ला पाने के लिए रेल विभाग के चक्कर लगाने पड़े और फिर वर्ष 2011 में दुर्गा के संघर्ष की जीत हुई और उसे अपने पिता का बिल्ला मिल गया। इसके बाद दुर्गा ने बैतूल रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करना शुरू कर दिया और दुर्गा बोरकर बैतूल की एकमात्र महिला कुली हैं।
संघर्ष भरा रहा दुर्गा का जीवन
बता दें कि महिला कुली दुर्गा बोरकर की पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं है। दरअसल दुर्गा के पिता भी रेलवे स्टेशन पर कुली का काम किया करते थे। जिन पर तीन बेटियों के पालन पोषण का जिम्मा था। बढ़ते समय के साथ उनके स्वास्थ्य ने उनका साथ नहीं दिया और उनका काम बंद हो गया। इसके बाद परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी दुर्गा ने अपने जिम्मे ले ली। दुर्गा के लिए सफर आसान तो नहीं था, सबसे पहले उसे अपने पिता का बिल्ला पाने के लिए रेल विभाग के चक्कर लगाने पड़े और फिर वर्ष 2011 में दुर्गा के संघर्ष की जीत हुई और उसे अपने पिता का बिल्ला मिल गया। इसके बाद दुर्गा ने बैतूल रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करना शुरू कर दिया और दुर्गा बोरकर बैतूल की एकमात्र महिला कुली हैं।
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दुर्गा को हल्दी लगाते सांसद उइके
- फोटो : सोशल मीडिया
सांसद ने लगाई हल्दी
दुर्गा बोरकर के लिए ये हल्दी-मेहंदी की रस्म इसलिए भी खास रही क्योंकि इस मौके पर सांसद दुर्गादास उइके शामिल हुए। उन्होंने भी आशीर्वाद स्वरूप हल्दी लगाई। इन रस्मों को लेकर स्टेशन स्टाफ में भी खासा उत्साह देखने मिल रहा था। रस्मों रिवाज के बाद वहां मौजूद समाजसेवी महिलाओं ने जमकर डांस भी किया। गुरुवार शाम दुर्गा की शादी कल्याण केंद्र में हुई। यहां सांसद, विधायक मेहमान बने और आशीर्वाद दिया। रेलवे प्रशासन, आरपीएफ स्टाफ और जीआरपी स्टाफ ने शादी की व्यवस्था संभाली।
क्या बोली दुर्गा
दुल्हन बनी दुर्गा का कहना है कि पिता का स्वास्थ्य ख़राब होने के बाद मैंने बेटे की तरह घर की जिम्मेदारी उठाई और 2011 में मैंने मेरे पिता का बिल्ला हासिल किया। मैंने कभी शादी के बंधन में बंधने के बारे में नहीं सोचा था। अब दीदी ने मेरी शादी करवा दी है। मैं अब भी मेरी सभी जिम्मेदारियों को पूरा करूंगी। वहीं दुर्गा के दूल्हे सुरेश भुमरकर ने कहा कि दुर्गा का अच्छा व्यवहार ही है। जिसे देखकर मैंने शादी के लिए हामी भरी। अब दुर्गा की जिम्मेदारियां निभाने में मैं उसका पूरा साथ दूंगा। इलाके के विधायक हेमंत खंडेलवाल का कहना है कि परिवार की जिम्मेदारी दुर्गा ने अपने हाथों में ली और उन्हें पूरा किया। शायद ही कोई महिला ऐसा करती, मगर आज पूरा शहर उनकी तारीफ करता है। हमारी पार्टी के कार्यकर्ता से दुर्गा की शादी हुई हम सभी खुश हैं।
दुर्गा बोरकर के लिए ये हल्दी-मेहंदी की रस्म इसलिए भी खास रही क्योंकि इस मौके पर सांसद दुर्गादास उइके शामिल हुए। उन्होंने भी आशीर्वाद स्वरूप हल्दी लगाई। इन रस्मों को लेकर स्टेशन स्टाफ में भी खासा उत्साह देखने मिल रहा था। रस्मों रिवाज के बाद वहां मौजूद समाजसेवी महिलाओं ने जमकर डांस भी किया। गुरुवार शाम दुर्गा की शादी कल्याण केंद्र में हुई। यहां सांसद, विधायक मेहमान बने और आशीर्वाद दिया। रेलवे प्रशासन, आरपीएफ स्टाफ और जीआरपी स्टाफ ने शादी की व्यवस्था संभाली।
क्या बोली दुर्गा
दुल्हन बनी दुर्गा का कहना है कि पिता का स्वास्थ्य ख़राब होने के बाद मैंने बेटे की तरह घर की जिम्मेदारी उठाई और 2011 में मैंने मेरे पिता का बिल्ला हासिल किया। मैंने कभी शादी के बंधन में बंधने के बारे में नहीं सोचा था। अब दीदी ने मेरी शादी करवा दी है। मैं अब भी मेरी सभी जिम्मेदारियों को पूरा करूंगी। वहीं दुर्गा के दूल्हे सुरेश भुमरकर ने कहा कि दुर्गा का अच्छा व्यवहार ही है। जिसे देखकर मैंने शादी के लिए हामी भरी। अब दुर्गा की जिम्मेदारियां निभाने में मैं उसका पूरा साथ दूंगा। इलाके के विधायक हेमंत खंडेलवाल का कहना है कि परिवार की जिम्मेदारी दुर्गा ने अपने हाथों में ली और उन्हें पूरा किया। शायद ही कोई महिला ऐसा करती, मगर आज पूरा शहर उनकी तारीफ करता है। हमारी पार्टी के कार्यकर्ता से दुर्गा की शादी हुई हम सभी खुश हैं।

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