लव और ड्रग्स जिहाद के आरोपों में घिरे भोपाल के बड़े मछली कारोबारी शारिक मछली परिवार का अवैध हथियारों से भी कनेक्शन सामने आया है। भोपाल क्राइम ब्रांच ने रविवार को टीकमगढ़ के जतारा क्षेत्र के एक गांव में कृषि यंत्र बनाने वाली फैक्टरी में छापा मारकर अवैध हथियार बनाने का खुलासा किया था। फैक्टरी से अवैध हथियारों समेत भारी मात्रा में हथियार बनाने के उपकरण जब्त किए गए हैं। जब्त सामान से कई दर्जन अवैध हथियार बनाए जा सकते हैं।
बताया जा रहा है कि फैक्टरी संचालित करने वाले सुरेंद्र विश्वकर्मा के पिता आनंदी विश्वकर्मा ने करीब 40 साल पहले लेथ मशीन का काम शुरू किया था। इसके बाद ट्रैक्टर की छोटी ट्रॉलियां, कृषि उपकरण और हथियार बनाने का काम शुरू किया गया। भोपाल क्राइम ब्रांच ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
इस अवैध फैक्टरी का खुलासा भोपाल में एमडी ड्रग्स की तस्करी करने वाले यासीन मछली के गुर्गे सैफुद्दीन और अन्य तस्करों से हुई पूछताछ के बाद हुआ। मछली परिवार के गिरोह को टीकमगढ़ का विश्वकर्मा परिवार कई हथियार बेच चुका था। इसी लिंक के आधार पर भोपाल क्राइम ब्रांच ने जतारा के पास एक गांव में कृषि यंत्र बनाने के नाम पर चलाई जा रही हथियार फैक्टरी पर छापा मारा था।
फैक्टरी चलाने वाला मास्टरमाइंड सुरेंद्र विश्वकर्मा लूट के एक प्रकरण में सात साल की सजा काट चुका है। जनवरी 2025 में ही वह जेल से छूटा था। जेल से छूटते ही सुरेंद्र ने अवैध शस्त्र निर्माण शुरू कर दिया। सुरेंद्र के परिवार की तीन पीढ़ियां अवैध हथियार बनाने के काम में लगी हैं। पहले सुरेंद्र के पिता आनंदी ने फैक्टरी शुरू की, फिर सुरेंद्र ने कारोबार संभाला और अब उसका बेटा भी इसमें शामिल है।
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पुलिस ने फैक्टरी में मारा छापा।
- फोटो : अमर उजाला
पूरा परिवार हथियार बना रहा
सुरेंद्र के पिता आनंदी विश्वकर्मा ने लगभग 40 साल पहले लेथ मशीन से ट्रॉली और कृषि उपकरण बनाने का कार्य शुरू किया था। आनंदी ने ही लेथ मशीन से अवैध हथियार बनाने का काम भी शुरू किया था। बाद में यह कारोबार सुरेंद्र ने संभाला। जब सुरेंद्र सात साल की सजा काटने जेल गया, तब उसकी फैक्टरी उसका बेटा चलाने लगा। जेल से लौटने के बाद सुरेंद्र ने फिर से कारोबार अपने हाथ में ले लिया। विश्वकर्मा परिवार ने पूरे परिवार को अवैध गतिविधियों में शामिल कर लिया था। आनंदी का नाबालिग पोता और दूसरा बेटा धर्मेंद्र भी इस काम में लगे थे। कार्रवाई से पहले सुरेंद्र और उसके नाबालिग बेटे को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तब भी आनंदी और धर्मेंद्र ने काम बंद नहीं किया।
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पुलिस ने फैक्टरी में मारा छापा।
- फोटो : अमर उजाला
कई राज्यों में फैला नेटवर्क
आनंदी और सुरेंद्र ने उन्नत मशीनों और उपकरणों के साथ फैक्टरी स्थापित की थी। पहले कलपुर्जे बाहर से मंगवाए जाते थे और यहां असेंबल किए जाते थे, बाद में सभी कलपुर्जे स्थानीय स्तर पर बनने लगे। इसके लिए विशेष मशीनें और उपकरण बड़े निवेश के साथ लगाए गए। जिस मकान में यह अवैध फैक्टरी संचालित की जा रही थी, वह पहले एक वेयरहाउस था। सुरेंद्र इसे 20 हजार रुपए प्रतिमाह किराये पर लेकर फैक्टरी चला रहा था। भोपाल के साथ-साथ मध्यप्रदेश के कई जिलों और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में सुरेंद्र का नेटवर्क फैला हुआ है।
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