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विश्व रेडियो दिवस: आकाशवाणी और विविध भारत के बाद एफएम रेडियो लाया क्रांति, आज भी करोड़ों दिलों पर करता है राज

Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Fri, 13 Feb 2026 07:35 AM IST
सार

रेडियो कभी मनोरंजन का प्रमुख साधन था, जिसने हिंदी गीतों और बिनाका गीतमाला से लोकप्रियता पाई। 1895 में मार्कोनी ने इसका आविष्कार किया। भारत में 1927 से प्रसारण शुरू हुआ। समय के साथ एफएम और मोबाइल रेडियो आए, फिर भी रेडियो आज भी सूचना, संगीत और अपनत्व का माध्यम बना हुआ है।

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World Radio Day today: After All India Radio and Vividh Bharat, FM radio brought revolution
World Radio Day : रेडियो को युवा भी पसंद करते हैं। - फोटो : अमर उजाला
मन को बहलाने और संगीत के लिए किसी समय रेडियो ही मनोरंजन का प्रमुख साधन हुआ करता था। हिंदी फिल्मों के गीतों का चलन तब अधिक हुआ, जब रेडियो पर इनका प्रसारण होना आरंभ हुआ। रेडियो की लोकप्रियता में वृद्धि होती गई। बिनाका गीत माला, जो रेडियो सिलोन श्रीलंका से प्रसारित होती थी, के दीवानों की संख्या सर्वाधिक थी। समय के साथ संसाधन बदलते गए और उनमें परिवर्तन आया। वर्तमान में एफएम रेडियो का प्रचलन आरंभ हुआ, जिसने रेडियो के संगीत और उसके तौर तरीके को ही बदल कर रख दिया। एक तरह से एफएम रेडियो ने नई क्रांति ला दी है।


मार्कोनी ने किया रेडियो का अविष्कार 
रेडियो का आविष्कार 1895 में इटली के वैज्ञानिक गूगलिएल्मो मार्कोनी ने किया था। 1896 में रेडियो का पेटेंट प्राप्त हुआ रेडियो के अविष्कार के लिए 1909 में मार्कोनी को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 

कब से मनाया जाता है रेडियो दिवस
विश्व रेडियो दिवस एक अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में प्रतिवर्ष 13 फरवरी को मनाया जाता है। इसका प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र संघ की आमसभा ने 2011 में पारित किया था। रेडियो  दिवस मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य रेडियो को सूचना, मनोरंजन और शिक्षा के रूप में जन-जन तक पहुंचाना था।

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World Radio Day : 1936 में इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो कर दिया गया। फिर इसे आकाशवाणी के नाम से जाना जाने लगा। - फोटो : अमर उजाला
भारत में 1927 में आया रेडियो
आविष्कार होने के तीन दशक बाद 1927 में भारत में पहला रेडियो स्टेशन इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के नाम से मुंबई में प्रारंभ हुआ। 1936 में इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो कर दिया गया। फिर इसे आकाशवाणी के नाम से  जाना जाने लगा। 

इंदौर में 1952 में बना स्टेशन
नगर में आकाशवाणी (रेडियो स्टेशन) की स्थापना मई 1952 में हुई थी। 1976 में यहां विविध भारती का प्रसारण केंद्र बना और यह बाद में एफएम में तब्दील कर दिया गया। अक्टूबर 2001 में नगर में पहला निजी रेडियो एफएम रेडियो मिर्ची आरंभ हुआ था। 

रेडियो और रोचकता
रेडियो सिलोन की बिनाका गीतमाला आज भी कई लोगों को इसलिए याद है कि मीठी आवाज के धनी ख्यात एंकर अमीन सयानी इस कार्यक्रम की जोरदार प्रस्तुति देते थे। इस पर कौन सा गीत किस पायदान पर है, यह जानने में लोगों की रूचि रहा करती थी। 

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World Radio Day : इंदौर में आकाशवाणी (रेडियो स्टेशन) की स्थापना मई 1952 में हुई थी। - फोटो : अमर उजाला
1971 की जंग के समाचार रेडियो पर सुनते थे
हरदा जिले के नाथूलाल मोयल बताते हैं कि हमारे गांव में ग्राम पंचायत में रेडियो था। बात 1971 के भारत पाक युद्ध की है। रेडियो पर प्रसारित होने वाले समाचारों को गांव के लोग एकत्र होकर सुना करते थे। इंदौर आकाशवाणी से सेवानिवृत हुईं अनिता जोशी का कहना है कि रेडियो पर फरमाइशी गीतों का प्रोगाम काफी पसंद किया जाता था। लोग कई कार्यक्रम के इंतजार में रहते थे। 

शादी में रेडियो गिफ्ट में देते थे
कुछ बुजुर्ग पुराने दौर को याद करते हुए कहते हैं कि शादी में रेडियो गिफ्ट में दिया जाता था। यह बड़ा गिफ्ट होता था। फिर रेडियो के लाइसेंस की भी चिंता रहती थी। खेती-किसानी के कार्य के लिए नंदा जी-भैराजी कार्यक्रम काफी रोचक रहता था। इसका ग्रामीण के साथ नगरीय क्षेत्रों के लोगों को इंतजार रहता था।

अब मोबाइल में एफएम रेडियो
समय बदला और वक्त नई तकनीक के दौर में मोबाइल में ही एफएम रेडियो चलने लगे हैं। मनपसंद हजारों गीतों की मेमोरी चिप के साथ रेडियो भी बाजार में आने लगे हैं, पर आज भी रेडियो पर गीत संगीत सुनने का आनंद अलग है। रेडियो सुनने से एकाकीपन दूर होता है। श्रोता रेडियो सुनते रहेंगे और रेडियो की उपयोगिता भविष्य में कायम रहेगी।
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