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Ujjain: विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व संग्रहालय में सुरक्षित है ऐरावत हाथी के वंशज का विशाल मस्तक

Sun, 25 Jun 2023 02:24 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Sun, 25 Jun 2023 02:24 PM IST
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Ujjain: The huge head of Airavat elephant's descendant is safe in Vikram University's Archaeological Museum
संग्रहालय में रखा हाथी का विशाल मस्तक - फोटो : अमर उजाला
मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन, धर्म, इतिहास, साहित्य और पुरातत्व के मान से विश्व पटल पर कई बार अपना नाम अंकित कर चुकी है। उज्जैन के प्राचीन इतिहास की गौरव गाथा समझने और देखने के लिए भारत सहित विश्व भर के इतिहासकार, साहित्यकार और पुराविद् समय-समय पर उज्जैन आते रहते हैं। देशभर के आयुर्वेद से जुड़े साहित्य से जुड़े और प्राचीन कला से जुड़े महान जानकारों के उज्जैन में अखिल भारतीय स्तर पर सम्मेलन भी आयोजित होते हैं। इसका यही कारण है कि उज्जैन इतिहास और पुरातात्विक धरोहर के रूप में अमूल्य है। पुरातत्व के रूप में उज्जैन की बात की जाए तो इस प्राचीन नगरी में चारो और अनेक जानकारियां बिखरी पड़ी है। लेकिन ऐसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां हैं, जिसका आज भी लोगों को पता नहीं है। ऐसी ही एक अनमोल और ऐतिहासिक धरोहर उज्जैन में है, जिसकी जानकारी लगते ही हर कोई अचंभित हो उठेगा। 
Ujjain: The huge head of Airavat elephant's descendant is safe in Vikram University's Archaeological Museum
पांच लाख वर्ष पुराना है हाथी का मस्तक - फोटो : अमर उजाला
उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व संग्रहालय में कांच के बड़े शोकेस में विशाल और बड़े मस्तक को बहुत ही सहेज कर रखा गया है। इस विशाल मस्तक को देखकर जब इसके बारे में विशेष पड़ताल की तो जो जानकारी सामने आई वह अचंभित कर देने वाली थी। दरअसल यह एक हाथी का मस्तक है, जो कांच के बड़े शोकेस में बड़े ही सुरक्षित तरीके से रखा गया है। हाथी के इतने बड़े इस मस्तक को देखकर इसके बारे में जब जानकारी जुटाई गई तो इस बारे में उज्जैन विक्रम विश्वविद्यालय के पुराविद् डॉ. रमण सोलंकी ने बताया कि यह मस्तक हाथी का ही है और यह मस्तक पुरातत्व विद डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर की देवाकचार नदी से 12 जून 1979 को खुदाई के वक्त मिला था, जिसे उज्जैन लाया गया।
Ujjain: The huge head of Airavat elephant's descendant is safe in Vikram University's Archaeological Museum
विक्रम विश्वविद्यालय (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
पांच लाख वर्ष पुराना है हाथी का मस्तक
उन्होंने बताया कि हाथी के मस्तक के बारे में जो जानकारियां प्राप्त हुई थीं, उसके अनुसार यह भगवान इंद्र के ऐरावत हाथी के संप्रदाय के एक हाथी का मस्तक है और भारत के सबसे बड़े हाथी का मस्तक होने का भी प्रमाण मिला है। डॉ. सोलंकी के अनुसार इस हाथी के मस्तक को मिलने के बाद इसकी जो तिथि आई है वह लगभग पांच लाख वर्ष पुरानी है।

गेंडे का सींग, दरियाई घोड़े का दांत भी मौजूद
हाथी के मस्तक के साथ ही उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय के संग्रहालय में लाखों वर्ष पुराने गेंडे का सींग, दरियाई घोड़े का दांत, सहित करीब 200 फॉसिल्स मौजूद हैं, जिन्हें बहुत ही सहज और संभाल कर रखा गया है।
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