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भस्म आरती: महाकाल ने पहनी ऐसी माला जिसे देखकर श्रद्धालु रह गए दंग, चारों ओर गूंज उठे बाबा के जयकारे
Fri, 14 Aug 2026 07:33 AM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
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Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 07:33 AM IST
सार
श्रावण शुक्ल द्वितीया पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालु उमड़े। रात 3 बजे शुरू हुई आरती में बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक, भव्य शृंगार और भस्म अर्पण किया गया। अनोखी माला से सजे बाबा के दिव्य स्वरूप के भक्तों ने दर्शन किए।
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उज्जैन महाकाल के भस्म आरती शृंगार दर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्रावण शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर शुक्रवार सुबह विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्त देर रात से ही कतार में लग गए थे। सुबह मंदिर परिसर में हर ओर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारे गूंजते रहे।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती रात 3 बजे शुरू हुई। मंदिर के पट खुलने के बाद वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर गर्भगृह में स्थापित भगवान की प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से अभिषेक किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का भव्य शृंगार किया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई।
ये भी पढ़ें- श्रावण के पहले चौंके लोग!: नागपंचमी से ठीक पहले कुसुमेश्वर महादेव मंदिर मे शिवलिंग पर दिखाई दिए नागराज
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झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर बाबा महाकाल को एक अनोखी माला से शृंगारित किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। शृंगार के बाद बाबा महाकाल का दिव्य और मनमोहक स्वरूप दिखाई दिया। हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिभाव का माहौल रहा और ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से परिसर गूंजता रहा। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
यह है आरती का समय
• भस्म आरती सुबह 3 से 6 बजे तक
• दद्योदक आरती प्रात: 7 से 7:45 बजे तक
• भोग आरती प्रात: 10 से 10:45 बजे तक
• संध्या पूजन सायं 5 से 5:45 बजे तक
• संध्या आरती सायं 7:00 से 7:45 बजे
• शयन आरती रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तकमहाकालेश्वर मंदिर मे आरतियों के समय में हुआ यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक जारी रहेगा।
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श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती रात 3 बजे शुरू हुई। मंदिर के पट खुलने के बाद वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर गर्भगृह में स्थापित भगवान की प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से अभिषेक किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का भव्य शृंगार किया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई।
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झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर बाबा महाकाल को एक अनोखी माला से शृंगारित किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। शृंगार के बाद बाबा महाकाल का दिव्य और मनमोहक स्वरूप दिखाई दिया। हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिभाव का माहौल रहा और ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से परिसर गूंजता रहा। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
यह है आरती का समय
• भस्म आरती सुबह 3 से 6 बजे तक
• दद्योदक आरती प्रात: 7 से 7:45 बजे तक
• भोग आरती प्रात: 10 से 10:45 बजे तक
• संध्या पूजन सायं 5 से 5:45 बजे तक
• संध्या आरती सायं 7:00 से 7:45 बजे
• शयन आरती रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तकमहाकालेश्वर मंदिर मे आरतियों के समय में हुआ यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक जारी रहेगा।
