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'मक्का में तूफानी हवाओं का बरपा कहर'
Sat, 12 Sep 2015 04:20 PM IST
Updated Sat, 12 Sep 2015 04:20 PM IST
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'मक्का में तूफानी हवाओं का बरपा कहर'
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सऊदी अरब के शहर मक्का में शुक्रवार को क्रेन हादसा स्थानीय समय के मुताबिक शाम 5.30 बजे के बाद हुआ। मुसलमान इसी वक़्त मग़रिब की नमाज़ पढ़ते हैं। ठीक उससे थोड़ी देर पहले ये हादसा हुआ। इस हादसे से पहले तेज़ हवाएं चलने लगीं जिन्हें हम तूफ़ानी हवाएं कहते हैं। मक्का एक वादी है और पहाड़ों के बीच बसा शहर है। तेज़ हवाओं के बाद मूसलाधार बारिश शुरू हुई। इसी दौरान अल हरम मस्जिद के बाहर लगी हुई कई क्रेनों में से एक क्रेन टूटकर गिर गई। इस क्रेन ने मस्जिद के कॉन्क्रीट वाले हिस्से को काट दिया और उसका मलबा काबा के पास भी गिरा जहां लोग चारों तरफ़ चक्कर लगाते हैं।
सिराज वहाब/संपादक, अरब न्यूज़
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क़रीब आठ लाख हाजी दुनिया के कोने-कोने से मक्का पहुंचे हैं और इतनी ही तादाद में अगले 9 दिनों तक लोग आएंगे जब हज 21 सितंबर से हज शुरू होगा। इस मस्जिद के विस्तार का काम हो रहा है जो पिछले दो साल से जारी है। इसमें अभी काफी वक़्त लग सकता है। दरअसल हज के लिए आने वालों की तादाद यहां हर साल बढ़ती जा रही है जिसे देखते हुए यह विस्तार किया जा रहा है।
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हालांकि निर्माण का काम पिछले 10 दिनों से बंद हो गया था। लेकिन काम बंद हो जाने के बावजूद इन क्रेनों को क्यों नहीं हटाया गया, इसका जवाब हमारे पास नहीं है। यह दिल्ली के जामा मस्जिद की तरह नहीं है। इस मस्जिद के बीच में बिल्कुल खुली जगह है जिसे मताफ़ कहते हैं। इसके ठीक बीच में काबा है जो काले रंग की एक घनाकार संरचना है। इसी काबा के बाहर हाजी सात चक्कर लगाते हैं। इस मस्जिद का केंद्र काबा है।
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इससे अलग एक तीन मंजिल वाली इमारत बनी हुई है जो मस्जिद कहलाती है। इसमें से एक छत वाला हिस्सा है जहां 10 लाख लोग नमाज़ पढ़ सकते हैं। यानी इस क्षेत्र में पहले काबा है और एक खुला क्षेत्र है जहां लोग चक्कर लगाते हैं, उसके बाद एक गोलाकार संरचना है जिसे हम मस्जिद कहते हैं। इस गोलाकार संरचना के बाद एक खुला परिसर है। मक्का पहाड़ों के बीच की एक वादी है। इस वादी के बीच मौजूद काबा ही इसका केंद्र है।
(बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली से बातचीत पर आधारित)
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