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बिटकॉइन

Wed, 02 Jun 2021 04:32 PM IST
अमर उजाला दिल्ली
अमर उजाला दिल्ली Updated Wed, 02 Jun 2021 04:32 PM IST
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bitcoin

पिछले दिनों डिजिटल करेंसी बिटकॉइन के मूल्य ने जब 1,240 डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ, तो दुनिया भर के लोगों में इसके प्रति उत्सुकता देखी गई, पर हमारे देश में इसका प्रयोग विरले ही हो रहा है। आगामी 14-15 दिसंबर को बिटकॉइन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक संगठन द्वारा बंगलूरू में एक कांफ्रेंस का भी आयोजन किया जा रहा है।

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इस करेंसी को वर्ष 2009 में सतोशी नाकामोतो नाम के एक छद्म समूह ने प्रचलित किया था। इसे क्रिप्टोकरेंसी भी कहा जाता है, क्योंकि भुगतान के लिए यह क्रिप्टोग्राफी का इस्तेमाल करता है। बिटकॉइन के लेन-देन के लिए उपभोक्ता को प्राइवेट की (कुंजी) से जुड़े डिजिटल माध्यमों से भुगतान का संदेश भेजना पड़ता है, जिसे दुनिया भर में फैले विकेंद्रीकृत नेटवर्क के जरिये सत्यापित किया जाता है।
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इसके जरिये होने वाला भुगतान डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिये होने वाले भुगतान के विपरीत अपरिवर्तनीय है। इसके अलावा, डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड के मुकाबले बिटकॉइन भुगतान को जानकार ज्यादा सुरक्षित बताते हैं।
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बिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है, जिसका इस्तेमाल केवल ऑनलाइन लेनदेन के लिए किया जाता है। चूंकि यह किसी केंद्रीय बैंक द्वारा समर्थित नहीं है, इसलिए निजी तौर पर इसका विनिमय होता है। इसे 'माइनिंग' नामक एक प्रक्रिया के जरिये जेनरेट किया जाता है, जिसके लिए एक खास किस्म के सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। इसके लिए द्रुत गति वाले प्रोसेसर एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति की जरूरत है, जो हमारे देश में मुश्किल है। बिटकॉइन के मूल्यों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या एक मुद्रा के रूप में कार्य करने में यह सक्षम है।

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