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झोटा की कहानी: बॉक्सिंग में 2 गोल्ड, एक सिल्वर मेडल, क्रिकेटर भी था; पहले खुद नशे से लड़ा; फिर दूसरों की लड़ाई

Mon, 19 Oct 2026 09:32 AM IST
Sharukh Khan भारत भूषण मित्तल, संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा
भारत भूषण मित्तल, संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 19 Oct 2026 09:32 AM IST
सार

पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा पहले खुद नशे से लड़ा था। इसके बाद दूसरों के लिए लड़ाई लड़ने लगा था। झोटा ने बॉक्सिंग में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल  जीते थे। वह क्रिकेट में भी माहिर था।

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Parminder Jhota Won Two Gold and One Silver in Boxing, Fought Drug Abuse Before Taking on Punjab Drug Mafia
parvinder singh jhota murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कभी खुद नशे की गिरफ्त में रहा परविंदर झोटा जब इससे बाहर निकला तो उसने दूसरों को नशे से बचाने की ठान ली। करीब चार-पांच साल पहले उसने नशा तस्करों के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की। मानसा के लोगों के मुताबिक, नशा बेचने वालों ने उसे पैसों का लालच देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश की लेकिन वह नहीं झुका। आखिरकार, गोलियां मारकर उसकी हत्या कर दी गई। झोटा की जिंदगी संघर्ष की ऐसी कहानी है, जिसमें खेल के मैदान से लेकर नशे के खिलाफ लड़ाई तक कई पहलू जुड़े हैं।


झोटा को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था। परिचितों के मुताबिक, वह टीम में ऑलराउंडर के तौर पर खेलता था। मानसा में जिला स्तरीय टूर्नामेंट के दौरान उसने युवराज सिंह की तरह छह गेंदों पर छह छक्के जड़े थे। 12वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान स्कूल के डीपी मास्टर ने उसे बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया। उसने स्कूली स्तर पर बॉक्सिंग में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता।
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Parminder Jhota Won Two Gold and One Silver in Boxing, Fought Drug Abuse Before Taking on Punjab Drug Mafia
परविंदर झोटा ने जीता बॉक्सिंग का मैच - फोटो : संवाद/फाइल
युवाओं को सिखाए खेल के गुर
पढ़ाई पूरी करने के बाद झोटा मानसा लौट आया और स्थानीय युवाओं को क्रिकेट सिखाने लगा। उसके खेल कौशल को देखते हुए क्रिकेट एसोसिएशन ने उसे जिला कोच बनाया। कोचिंग के बदले उसे वेतन भी मिलता था। वह खुद भी क्रिकेट टूर्नामेंटों में हिस्सा लेता रहता था।
Parminder Jhota Won Two Gold and One Silver in Boxing, Fought Drug Abuse Before Taking on Punjab Drug Mafia
बाक्सिंग के साथियों के साथ झोटा - फोटो : संवाद/फाइल
मानसा के लोगों के मुताबिक, झोटा एक समय खुद नशा करता था लेकिन इससे बाहर निकलने के बाद उसने नशे के खिलाफ मुहिम शुरू कर दी। वह चिट्टा बेचने वालों और मेडिकल स्टोरों पर नशीले पदार्थ बेचने वालों का विरोध करता था।
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परविंदर सिंह झोटा - फोटो : संवाद
लोगों का दावा है कि उसके खिलाफ कई पुलिस केस दर्ज करवाए गए लेकिन उसने संघर्ष जारी रखा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नशे के कारोबार से जुड़े अश्वनी ने उसे गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया। मामले में आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होनी है।
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परविंदर सिंह झोटा - फोटो : संवाद
मां ने कहा था- अपना ध्यान रखना
झोटा के परिचितों के मुताबिक, हत्या से कुछ दिन पहले उसने दोस्तों के सामने आशंका जताई थी कि उसे गोली मारी जा सकती है। उसकी मां ने भी बातचीत में बताया था कि एक सपना आने के बाद उन्होंने बेटे को चार-पांच दिन अपना ध्यान रखने के लिए कहा था।
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