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पंजाब: 36 हजार से ज्यादा खुदरा-थोक दवा विक्रेता, निगरानी के लिए महज 51 अधिकारी; छह साल से नहीं हुई भर्ती

Mon, 19 Oct 2026 09:49 AM IST
Sharukh Khan राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 19 Oct 2026 09:49 AM IST
सार

पंजाब में 36 हजार से ज्यादा खुदरा-थोक दवा विक्रेता हैं, इनकी निगरानी के लिए महज 51 अधिकारी हैं। छह साल से भर्ती नहीं हुई है। डेढ़ साल में 20.64 करोड़ की दवाएं जब्त हुई हैं। ऐसे में फार्मा नशे पर अंकुश लगाने और दवा बिक्री से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करवाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। 

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Punjab Has Over 36,000 Drug Retailers and Wholesalers but Only 51 Drug Control Officers, No Recruitment
Medicine - फोटो : Medicine

विस्तार

पंजाब में नशे की दवाओं का बाजार हजारों दुकानों में फैला है लेकिन निगरानी के लिए महज 51 ड्रग कंट्रोल अधिकारी हैं। प्रदेश में 36,112 खुदरा और थोक दवा विक्रेताओं पर नजर रखने, दवाओं की गुणवत्ता जांचने और प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री रोकने की जिम्मेदारी इसी सीमित अमले पर है। 
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ऐसे में फार्मा नशे पर अंकुश लगाने और दवा बिक्री से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करवाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। विभाग में छह साल से अधिक समय से नई भर्ती नहीं हुई है, जबकि कार्रवाई के दौरान करोड़ों रुपये की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं।
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पंजाब में दवा दुकानों की जांच के साथ लाइसेंस संबंधी मामलों, दवाओं के नमूने लेने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी भी ड्रग कंट्रोल विभाग की है। प्रदेश में 11 क्षेत्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण भी दवा बाजार की निगरानी से जुड़े हैं। इसके बावजूद अधिकारियों की सीमित संख्या नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई के रास्ते में बड़ी चुनौती है।
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कई जिलों में एक ही अधिकारी
लुधियाना में छह, अमृतसर में पांच और जालंधर, मोहाली व पटियाला में चार-चार ड्रग कंट्रोल अधिकारी तैनात हैं। वहीं, फतेहगढ़ साहिब, कपूरथला, नवांशहर और पठानकोट समेत कई जिलों में केवल एक अधिकारी है।

विभाग में वर्ष 2020 में 11 अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। इसके बाद छह साल से अधिक समय से नई भर्ती नहीं हुई है। नए पद सृजित करने की दिशा में भी ठोस पहल सामने नहीं आई है।

डेढ़ साल में 20.64 करोड़ की दवाएं जब्त
विभाग ने एक अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच 16,788 छापे मारे। इस दौरान ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 के उल्लंघन के मामलों में लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस संचालित फर्मों से 20.64 करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की गईं। हालांकि, जब्त दवाओं की पूरी मात्रा को फार्मा नशे से जुड़ा नहीं माना जा सकता।
 

निगरानी व्यवस्था में बदलाव जरूरी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पंजाब के पूर्व प्रधान डॉ. सुनील कटारिया के मुताबिक, सीमित अधिकारियों के लिए हजारों दुकानों की नियमित जांच करना मुश्किल है। अधिकारियों को निरीक्षण के अलावा अन्य जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। ऐसे में संयुक्त टीमें बनाकर निगरानी बढ़ाने और प्रतिबंधित दवाओं के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करने की जरूरत है।
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