थार की समृद्ध वाणी गायन परंपरा को सहेजने और लोकसंगीत को नया आयाम देने वाले वाणी उत्सव 2025 का रविवार को हजारों संगीत प्रेमियों की उपस्थिति में भव्य समापन हुआ। उत्सव के दूसरे दिन दानजी स्मृति मारवाड़ भजनी पुरस्कार और हरजस उत्सव पुरस्कार के विजेताओं को सम्मानित किया गया। साथ ही रुमायना रंगोत्सव, मुंबई में भाग लेने वाले कलाकारों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए और अन्य श्रेष्ठ कलाकारों को वीणा वाद्ययंत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। शनिवार 10 बजे आरम्भ हुआ वाणी उत्सव रविवार को चार बजे तक अनवरत जारी रहा, जिससे कलाकारों का उत्साह चरम पर रहा।
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कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समा बांधा। पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया ने अपने भजनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
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दानजी स्मृति मारवाड़ भजनी पुरस्कार के विजेता
इस पुरस्कार के अंतर्गत पांच विजेताओं को 25 हजार रुपए की राशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विजेता कलाकारों को मंच पर विशेष स्थान देकर उनके योगदान को सराहा गया। नवोदित कलाकार श्रेणी में गडरारोड बाड़मेर से रेखा हेतल, युवा कलाकार श्रेणी में सरणाऊ सांचौर से सुरेश लोहार, वरिष्ठ श्रेणी कलाकार में सियानी बाड़मेर से कुंभाराम और पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया मध्यप्रदेश, वहीं डिजिटल माध्यम से वीणा भजनों के प्रचार-प्रसार हेतु जालौर से भंवरलाल माली को विजेता घोषित किया गया।
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हरजस उत्सव 2025 पुरस्कार के विजेता
हरजस गायन प्रतियोगिता के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले गायकों को 11 हजार रुपए की राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। जिसमें सनावड़ा बाड़मेर से अमरु देवी, सोडियार बाड़मेर से मोहिनी चौधरी और सिणधरी बालोतरा से समदा विश्नोई विजेता रहे। इसी क्रम में लोक संगीत की परंपरा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 50 कलाकारों को 5 लाख तक कि राशि के वीणा वाद्ययंत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
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वाणी गायन कलाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों : कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समा बांधा। पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया ने अपने भजनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। धनाऊ बाड़मेर से पिच्यासी वर्षीय वीणा गायक कुंभाराम की वाणी ने संगीत के सभी पदों को लांग दिया। जालौर के सुरेश लोहार और नांद बाड़मेर के सुरेश जाणी ने शानदार गायन प्रस्तुती से हवेली रिसॉर्ट में पधारे जन सैलाभ को मंत्र मुग्ध कर दिया। अमरू देवी ने हरजस गायन की अद्भुत प्रस्तुति दी, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। समापन समारोह के दौरान सभी वाणी गायक कलाकारों और हरजस गायक माताओं ने अगले साल फिर मिलने का वादा करते हुए विदाई ली।