पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने वाले हैं। सभी की नजरें राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और सीटों पर है। किसकी जीत होगी और किसकी हार इसका पता भी कुछ देर में चल जाएगा। राजनीति में सत्ता परिवर्तन, हार जीत तो होती ही रहती है लेकिन किसी दल विशेष का नेतृत्वकर्ता कैसा है और वह किस तरह के अपनी पार्टी को सत्ता में लाने व जनता के बीच लोकप्रिय करने की कवायद में लगा रहता है, यह मायने रखता है। राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी हैं। महिलाएं सत्ता संभाल रही हैं तो वहीं राजनीतिक दल का नेतृत्व भी कर रही हैं। इन्हीं में से एक नाम है अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल का। अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार में मंत्री हैं। चलिए जानते हैं मोदी कैबिनेट में शामिल होने वाली महिला नेता अनुप्रिया पटेल के बारे में, राजनीति में क्या है उनकी उपलब्धि ?
Anupriya Patel: पिता की राजनीतिक विरासत को संभाल रहीं अनुप्रिया पटेल के बारे में जानें रोचक बातें
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अनुप्रिया पटेल का जीवन परिचय
अनुप्रिया पटेल भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं। साल 2014 में जब मोदी सरकार केंद्र की सत्ता में आईं थीं, तब अनुप्रिया पटेल को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाया गया था। अनुप्रिया पटेल एक राजनीतिक परिवार से आती हैं।
अनुप्रिया पटेल का बचपन और परिवार
मोदी कैबिनेट में मंत्री अनुप्रिया पटेल का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में 28 अप्रैल 1981 को हुआ था। अनुप्रिया पटेल के पिता का नाम सोने लाल पटेल है। सोने लाल पटेल यूपी में अपना दल राजनीतिक पार्टी के संस्थापक थे। अनुप्रिया पटेल ने मनोविज्ञान में परास्नातक किया है और एमबीए की डिग्री हासिल की। उनकी तीन बहनें और हैं। पिता की मौत पर अनुप्रिया और उनकी तीनों बहनों ने सोनेलाल की अर्थी को कंधा दिया।
अनुप्रिया पटेल का राजनीतिक करियर
राजनीतिक परिवार से होने के बाद भी अनुप्रिया पटेल राजनीति में नहीं आना चाहती थीं लेकिन उनके पिता सोने लाल पटेल की अचानक मौत के बाद अनुप्रिया पटेल ने राजनीति में कदम रखा और पिता की पार्टी संभाली। सोने लाल पटेल अपने दौर के बड़े नेताओं में शामिल थे। उन्हें बहुजन समाज पार्टी के संस्थापकों में भी गिना जाता है। लेकिन मायावती से मतभेद के बाद उन्होंने अपना दल की स्थापना की। जब 28 साल की अनुप्रिया ने राजनीति में कदम रखा तो उन्हें पिता की पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। उन दिनों अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल पार्टी की कमान संभाल रही थीं। लेकिन आगे चलकर परिवार में तनाव हो गया और पार्टी दो भागों में बंट गई। अनुप्रिया ने अपना दल (एस) बना लिया।
अनुप्रिया पटेल की उपलब्धि
अनुप्रिया पटेल ने साल 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में वाराणसी से करीबी रोहनिया विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। वहीं साल 2014 में उनकी पार्टी ने भाजपा से गठबंधन कर लिया। अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से भी सांसद बनीं। जब वह सांसद बनी तो रोहनिया सीट खाली हो गई। बाद में उनकी मां ने रोहनिया से चुनाव लड़ा। लेकिन अनुप्रिया चाहती थीं कि उनके पति इस सीट से खड़े हों। कृष्णा की हार के बाद पारिवारिक विवाद बढ़ गया और इस कारण उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया लेकिन तब तक अनुप्रिया कैबिनेट में मंत्री बन चुकी थीं। उनकी अपनी पहचान बन गई। उन्होंने साल 2016 में खुद की पार्टी अपना दल (एस) बना ली। साल 2018 में वह इस पार्टी की अध्यक्ष बनीं।

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