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इंजीनियर डे ऑफ इंडिया: मिलिए भारत की इन महिला इंजीनियर से, जिन्होंने रचा इतिहास

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 15 Sep 2021 11:07 AM IST
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engineer's day of india meet these women engineers of india who created history
Woman Engineer - फोटो : Twiiter/CCLRanchi

हर साल आज के दिन यानी 15 सितंबर को भारत का अभियंता दिवस (इंजीनियर्स डे) मनाया जाता है। आज के ही दिन भारत के महान इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म हुआ था। उन्हें भारत रत्न की उपाधि मिली हुई है। मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ने ही आधुनिक भारत की रचना की और देश को एक नया रूप दिया। उन्होंने देश में कई बड़ी नदियों पर बाँध और पुल बनाये। उनके नाम पर ही आज के दिन अभियंता दिवस की शुरुआत हुई। इंजीनियरों को प्रोत्साहित करने के लिए ये दिन मनाया जाता है, ताकि वो दुनियाभर में अपने हुनर के जरीए विकास की राह बना सकें।विश्वेश्वरैया के बाद आज भारत के कई अव्वल दर्जे के इंजीनियर हैं। भारत के इंजीनियर्स ने केवल देश को बल्कि विश्व के तमाम देशों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस प्रयास में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। भारत में ऐसी कई महिला इंजीनियर हैं, जिन्होंने मात्र इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं ली, बल्कि अपने काम से अभियंताओं की श्रेणी में महिलाओं के लिए भी एक स्थान बना लिया। आइए जानते हैं भारत की महिला इंजीनियर के बारे में।  

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Woman engineer - फोटो : Twitter/Saikiranpurella

सीआईएल की पहली महिला खनन इंजीनियर आकांक्षा कुमारी

झारखंड की आकांक्षा कुमारी भूमिगत खदान में काम करने वाली भारत की पहली महिला खनन इंजीनियर हैं। कोल इंडिया की महिला इंजीनियर आकांक्षा कुमारी ने बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सिंदरी से ग्रेजुएशन किया हैं। आकांक्षा झारखंड के ही हजारीबाग जिले की रहने वाली हैं। 25 साल की उम्र में आकांक्षा कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की दूसरी महिला खनन इंजीनियर हैं। वहीं आकांक्षा झारखंड में उत्तरी करनपुरा क्षेत्र में चुरी भूमिगत खदानों में सीआईएल में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला बनी। आकांक्षा ने इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए काफी मेहनत की। सीआईएल की महिला खनन इंजीनियर बनने से पहले उन्होंने राजस्थान में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की बलरिया खान में तीन साल काम किया।

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Woman engineer - फोटो : Twiiter/CCLRanchi

सीसीएल की प्रथम उत्खनन इंजीनियर शिवानी मीणा 


राजस्थान की शिवानी मीणा सीसीएल की पहली उत्खनन इंजीनियर हैं। शिवानी सीसीएल की रजरप्पा परियोजना में अपना योगदान दे रही हैं। रजरप्पा क्षेत्र की मैकेनाइज्ड खुली खदान में काम करने वाली शिवानी उत्खनन कैडर की पहली महिला इंजीनियर हैं, जो खुली खदान में कार्य कर रही हैं। शिवानी राजस्थान के भरतपुर की रहने वाली हैं। शिवानी मीणा ने आईआईटी जोधपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है। उन्हें भारी मशीनों के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी दी गई है। 

 

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Electrical Engineer - फोटो : Facebook /causeofIndians

भारत की पहली महिला इलेक्ट्रिकल इंजीनियर ए. ललिता

शिवानी मीणा और आकांक्षा कुमारी जैसी लड़कियों को इंजीनियरिंग की राह पर प्रेरित करने और इस क्षेत्र में महिलाओं के लिए स्थान बनाने का श्रेय जाता है भारत की पहली महिला इंजीनियर ए. ललिता को। जिस दौर में औरतें रूढ़िवादिता और कुप्रथाओं के तले दबी हुईं थीं, तब ए. ललिता ने भारत की पहली महिला इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बन कर महिलाओं के लिए इंजीनियरिंग के द्वार खोले। 27 अगस्त 1919 में जन्मी ललिता के पिता पप्पू सुब्बा राव इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे। सात बच्चों के परिवार में ललिता पांचवी संतान थीं। 15 साल की उम्र में उनकी शादी हुआ और 18 साल में एक बच्ची की माँ बन गयी। बच्ची के जन्म के चार महीने बाद पति का निधन हो गया। ललिता ने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई जारी रखी। मद्रास कांलेज आंफ इंजीनियरिंग में उन्होंने दाखिला लिया और 1943 के आसपास अपनी डिग्री हासिल की। 

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Civil Engineer - फोटो : Facebbok/smartinfrest

भारत की पहली सिविल इंजीनियर शकुंतला ए. भगत

अब बात करते हैं भारत की पहली महिला सिविल इंजीनियर शकुंतला ए. भगत की। उनके नाम एक बड़ी उपलब्धि है। शकुंतला ए. भगत ने कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक 69 पुल बनाए हैं। शकुंतला ए. भगत 1953 में मुंबई में वीरमाता जीजाबाई प्रौद्योगिकी संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाली पहली महिला थीं। वह 200 से ज्यादा पुलों की डिजाइन तैयार की चुकी हैं।

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