समंदर की उठती-गिरती लहरों को बना लिया जुनून, बन गईं देश की पहली महिला मरीन इंजीनियर
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सोनाली बनर्जी को मरीन इंजीनियर बनने का सपना उनके चाचा से मिला। जो कि नौसेना में काम करते थे। बचपन से उनके मुंह से समुद्र के बारे में सुनकर सोनाली को भी हमेशा जहाजों पर काम करने का मन होता था। बचपन से बड़े होते-होते सोनाली का ये सपना भी आकार लेने लगा और सोनाली मरीन में अपना करियर बनाने के बारे में सोचने लगीं।
इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद सोनाली ने बैचलर इन इलेक्ट्रॉनिक के मरीन इंजीनियरिंग के लिए कोलकाता के मरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया। सोनाली ने इस कोर्स में दाखिला 1995 में लिया था। जब कॉलेज में सोनाली का दाखिला हुआ तो वो एकमात्र महिला छात्र थीं। जिनके रहने की व्यवस्था करना कॉलेज के लिए बड़ी चुनौती बन गईं।
काफी विचार-विमर्श के बाद सोनाली को ऑफिसर्स क्वार्टर में ठहराया गया। 1999 में सोनाली मरीन इंजीनियरिंग पास कर 1500 छात्रों में देश की पहली महिला मरीन इंजीनियर बन चुकीं थीं। जल्दी ही सोनाली को मोबिल शिपिंग कंपनी में छह महीने के प्री-सी कोर्स में दाखिला मिल गया। इस कोर्स की ट्रेनिंग के लिए उन्हें सिंगापुर, श्री लंका, थाईलैंड, हांगकांग,फिजी और आस्ट्रेलिया भेजा गया।

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