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समंदर की उठती-गिरती लहरों को बना लिया जुनून, बन गईं देश की पहली महिला मरीन इंजीनियर

Sat, 27 Jun 2020 10:10 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Sat, 27 Jun 2020 10:10 AM IST
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first indian woman marine engineer sonali banerjee success story
sonali banerjee marine engineer - फोटो : Social Media
आजकल की महिलाएं जागरुक हैं। उन्हें पता है कि वो अपना करियर किस क्षेत्र में बनाएं लेकिन बीते सालों में ऐसा मुमकिन नहीं था। लड़कियों को हर क्षेत्र में करियर बनाने की आजादी नहीं थी। मरीन से जुड़े क्षेत्र में करियर बनाना तो दूर किसी लड़की का ऐसा सोचना भी थोड़ा मुश्किल था। ऐसे में सोनाली ने अपने सपनों को साकार किया और बन गईं देश की पहली महिला मरीन इंजीनियर। 



 
first indian woman marine engineer sonali banerjee success story
- फोटो : social media

सोनाली बनर्जी को मरीन इंजीनियर बनने का सपना उनके चाचा से मिला। जो कि नौसेना में काम करते थे। बचपन से उनके मुंह से समुद्र के बारे में सुनकर सोनाली को भी हमेशा जहाजों पर काम करने का मन होता था। बचपन से बड़े होते-होते सोनाली का ये सपना भी आकार लेने लगा और सोनाली मरीन में अपना करियर बनाने के बारे में सोचने लगीं। 



 
first indian woman marine engineer sonali banerjee success story
- फोटो : Social Media

इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद सोनाली ने बैचलर इन इलेक्ट्रॉनिक के मरीन इंजीनियरिंग के लिए कोलकाता के मरीन इंजीनियरिंग  रिसर्च इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया। सोनाली ने इस कोर्स में दाखिला 1995 में लिया था। जब कॉलेज में सोनाली का दाखिला हुआ तो वो एकमात्र महिला छात्र थीं। जिनके रहने की व्यवस्था करना कॉलेज के लिए बड़ी चुनौती बन गईं। 



 
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काफी विचार-विमर्श के बाद सोनाली को ऑफिसर्स क्वार्टर में ठहराया गया। 1999 में सोनाली मरीन इंजीनियरिंग पास कर 1500 छात्रों में देश की पहली महिला मरीन इंजीनियर बन चुकीं थीं।  जल्दी ही सोनाली को मोबिल शिपिंग कंपनी में छह महीने के प्री-सी कोर्स में दाखिला मिल गया। इस कोर्स की ट्रेनिंग के लिए उन्हें सिंगापुर, श्री लंका, थाईलैंड, हांगकांग,फिजी और आस्ट्रेलिया भेजा गया।



 
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महीनों तक समुद्र में रहना और घर-परिवार से कोसो दूर वो भी बिना किसी संपर्क के क्योंकि सेटेलाइट फोन भी बहुत कम इस्तेमाल करने को मिलता था। हांलाकि इलाहाबाद जैसे छोटे शहर की इस लड़की ने अपनी हिम्मत और काबिलियत के बल पर कामयाबी हासिल की। 26 अगस्त 2001 को मोबिल शिपिंग कंपनी के इस छह महीने के कोर्स को पूरा कर सोनाली ने इतिहास बना दिया। अब सोनाली को किसी भी जहाज के मशीन रूम में एंट्री करने का अधिकार मिल चुका था। जिस समय सोनाली ने इस कोर्स को पूरा किया उस समय उनकी उम्र मात्र 22 साल थी।
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