Kalpana Chawla Death Anniversary 2023: विश्व की महिलाएं धरती से आसमान तक अपने हुनर, काबिलियत का परचम लहरा रही हैं। भारतीय महिलाओं की बात करें तो राजनीति से लेकर औद्योगिक क्षेत्र तक, कला क्षेत्र से लेकर खेल जगत जगत तक हर क्षेत्र में दमदार भूमिका में हैं। वर्तमान में महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देने में इतिहास की कुछ दमदार महिलाओं की भूमिका अहम रही। आज हम चांद और मंगल ग्रह पर रहने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन अंतरिक्ष में रहने के सपने दिखाने वालों में एक भारतीय मूल की एक महिला भी शामिल है। इस महिला का नाम कल्पना चावला है। कल्पना चावला पहली भारतीय मूल की महिला थीं, जिन्होंने अंतरिक्ष तक का सफर तय किया था। उनकी इस उपलब्धि से महज महिलाओं को प्रेरणा नहीं मिली, बल्कि भारत के लिए गौरव और विश्व के लिए ऐतिहासिक पल बन गया। 1 फरवरी को कल्पना चावला की पुण्यतिथि है। वर्ष 2003 में कल्पना चावला का निधन तब हुआ जब कोलंबिया स्पेस शटल उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और यान में सवार सभी अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई। अगली स्लाइड्स में जानिए महिलाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देने वाली कल्पना चावला के जीवन और उपलब्धियों के बारे में।
Kalpana Chawla: अंतरिक्ष पर जाने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला की आखिरी उड़ान क्यों हो गई थी असफल
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कल्पना चावला का जीवन परिचय
हरियाणा के करनाल में 17 मार्च 1962 को कल्पना चावला का जन्म हुआ। उनके पिता का नाम बनारसी लाल चावला था और माता संज्योती चावला थीं। कल्पना सबसे छोटी थीं। उनकी शुरुआती शिक्षा करनाल में ही टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई।
कल्पना चावला कितनी पढ़ी लिखी थीं
कल्पना चावला का बचपन से ही पसंदीदा विषय विज्ञान रहा था। वह एक फ्लाइट इंजीनियर बनना चाहती थीं। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए कल्पना ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया और एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इस दौरान उन्हें नौकरी के ऑफर भी मिले। लेकिन वह आगे की पढ़ाई के लिए महज 20 साल की उम्र में अमेरिका चली गईं।
अमेरिका में पूरे हुए कल्पना चावला के सपने
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में कल्पना ने दाखिला लिया और दो साल की पढ़ाई के बाद एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। उन्होंने वर्ष 1986 में दूसरी मास्टर्स डिग्री हासिल की। बाद में 1988 में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी कर लिया। अब तक कल्पना ने तय कर लिया था कि उन्हें अंतरिक्ष पर जाना है। उनके पास अब कमर्शियल पायलट का लाइसेंस भी था और कल्पना एक सर्टिफाइड फ्लाइट इंस्ट्रक्टर बन चुकी थीं। इस दौरान उन्होंने फ्रांस के जान पियरे से शादी कर ली, जो खुद एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे।
नासा ने कल्पना को किया था रिजेक्ट
वर्ष 1993 में कल्पना चावला ने पहली बार नासा के लिए अप्लाई किया लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। 1995 में नासा ने कल्पना का चयन अंतरिक्ष यात्री के तौर पर किया। उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई और 1998 में अंतरिक्ष की पहली उड़ान के लिए कल्पना चावला को चुना गया। अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान कल्पना चावला ने 372 घंटे बिताते हुए इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया और भारत का मान बढ़ाया।

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