Mayawati Birthday 2023: भारतीय राजनीति में महिलाएं पुरुषों के समान ही सक्रिय भूमिका में हैं। इस समय देश के सर्वोच्च पद पर यानी भारत की राष्ट्रपति पद पर एक महिला आसीन हैं। वहीं कई राजनीतिक दलों में पार्टी अध्यक्ष से लेकर राज्य की भूमिका और राज्यपाल तक महिलाएं हैं। इन्हीं दमदार महिला राजनीतिज्ञों में से एक बड़ा नाम मायावती का है। मायावती उत्तर प्रदेश की राजनीति का दमदार चेहरा है। मायावती उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री हैं, वहीं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। मायावती एक ऐसी दमदार व्यक्तित्व की राजनीतिज्ञ महिला हैं, जिसने राज्य के मुखिया के दायित्वों का निर्वहन बखूबी किया और एक राजनीतिक दल का नेतृत्व भी करती आ रही हैं। यूपी में जातिगत राजनीति का जिक्र सब भी होता है, मायावती का नाम जरूर याद आता है। लेकिन मायावती का शुरू से ही राजनीति में आना चाहती थीं? मायावती के परिवार में कोई भी राजनीतिक पृष्ठभूमि का नहीं था लेकिन एक किशोरी जो एक शिक्षिका बन सकती थी, अचानक ही राजनीति की ओर मुड़ गई, कैसे? आज उत्तर प्रदेश की राजनीति की दमदार महिला मायावती का जन्मदिन है। मायावती के जन्मदिन के अवसर पर जाने उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें।
Mayawati: उत्तर प्रदेश की राजनीति का दमदार चेहरा बनी यह महिला शिक्षक, जानें मायावती से जुड़ी रोचक बातें
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मायावती का जीवन परिचय
मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 में दिल्ली के श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल में हुआ था। मायावती एक साधारण परिवार की बेटी हैं। जाटव परिवार में जन्मी मायावती गौतमबुद्ध नगर की रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम प्रभु दास था, जो कि दिल्ली के दूरसंचार विभाग में क्लर्क के पद पर सरकारी नौकरी में थे। मायावती की मां का नाम रामरती था। उनके छह भाई और दो बहनें भी थीं।
कितना पढ़ी लिखी हैं मायावती?
दिल्ली-नोएडा में पली बढ़ी मायावती के पास बीएड और एलएलबी की डिग्री है।1975 में मायावती ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज से कला में स्नातक किया था। 1976 में मायावती ने मेरठ विश्वविद्यालय से बीएड किया। बाद में 1983 में दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की।
मायावती भले ही आज राजनीति का जाना पहचाना नाम बन गई हों लेकिन बचपन में वह आईएएस बनना चाहती थीं। उन्होंने शिक्षा लेने के बाद प्रशासनिक सेवा में शामिल होने के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी की। इस बीच वह दिल्ली के एक स्कूल में अध्यापिका के तौर पर बच्चों को पढ़ाने लगीं।
राजनीति में कैसे आईं मायावती?
प्रशासनिक सेवा का सपना देखने वाली मायावती ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षिका के तौर पर की। हालांकि बाद में बाद में राजनीति में आ गईं। वह शुरू से बाबा साहब डाॅ भीमराव आंबेडकर से प्रभावित थीं। बाद में मायावती कांशीराम के सम्पर्क में आईं। वर्ष 1977 में कांशीराम मायावती के घर आए, जहां दोनों की मुलाकात हुई। कांशीराम मायावती के विचारों से प्रभावित हुए और जब 1984 में अपनी पार्टी बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की तो मायावती को भी शामिल किया।
बहुत कम लोगों को पता होगा कि मायावती के पिता नहीं चाहते थे कि वह राजनीति में आएं। लेकिन मायावती ने कांशीराम की पार्टी ज्वाइन की और बसपा की कोर टीम में शामिल हो गईं। इस कारण उनके पिता ने मायावती से रिश्ता तोड़ लिया।
मायावती ने किया यूपी का कायाकल्प
लेकिन मायावती ने अपनी राह चुन ली थी। दलितों की आवाज बनने का सपना लिए वह यूपी की राजनीति में शामिल हो गईं और चार बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। सबसे पहले 1995 में मायावती यूपी की सीएम बनी। फिर 1997 और साल 2002 में मायावती यूपी की मुखिया चयनित हुईं। साल 2007 में जनता ने एक बार फिर मायावती को मुख्यमंत्री चुना। इस बीच उन्होंने अपनी सरकार के कार्यकाल में अंबेडकर नगर का गठन किया। पांच अन्य जिलों का गठन किया जिसमें गौतम बुद्ध नगर से गाजियाबाद को अलग किया। इलाहाबाद से कौशांबी और ज्योतिबा फुले नगर को मुरादाबाद से अलग कर दिया।

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