Year Ender 2022 Five Historic Victories Of Women: महिला सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार, सरकारी और गैर सरकारी संगठन लगातार प्रयासरत हैं। हालांकि कई क्षेत्रों में महिलाओं को आज भी लिंग भेदभाव व असमानता का सामना करना पड़ रहा है। कभी महिलाओं को किसी मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होती, तो कहीं महिलाओं को पुरुषों के समान वेतन नहीं मिलता। इस असमानता को झेल रहीं महिलाओं के लिए लगातार ऐसे बड़े और ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं, जो उन्हें समाज में समान पायदान पर लाने में मदद करें। साल 2022 इन्हीं ऐतिहासिक प्रयासों का साल रहा। यह साल नारी शक्ति के नाम रहा। साल 2022 में कुछ ऐसे बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए, जो महिलाओं के हक में रहे। महिलाओं के अधिकारों को बढ़ाने, उन की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए इस साल पांच बड़े फैसले लिए गए। आइए जानते हैं महिलाओं की जीत वाले ऐसे बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में, जो साल 2022 में लिए गए।
Year Ender 2022: महिलाओं के हक में आए ये पांच बड़े फैसले, नारी शक्ति की जीत का रहा साल 2022
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समान अधिकार
वर्ष 2022 सितंबर में भारत की सर्वोच्च अदालत में महिलाओं के हक में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने देश की विवाहित और अविवाहित, सभी महिलाओं को गर्भपात का अधिकार दे दिया। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के तहत प्रत्येक गर्भवती महिला को 20 से 24 सप्ताह के बीच गर्भपात का अधिकार होगा। उनके विवाहित या अविवाहित होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, किसी महिला की वैवाहिक स्थिति को उसे अनचाहे गर्भ गिराने के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है। एकल और अविवाहित महिलाओं को भी गर्भावस्था के 24 सप्ताह में उक्त कानून के तहत गर्भपात का अधिकार है। चूंकि महिला के शरीर में एक भ्रूण विकसित होता है, इसलिए उसे निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
वैवाहिक यौन दुष्कर्म भी बलात्कार है
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए टिप्पणी करते हुए 'मैरिटल रेप' को भी बलात्कार की श्रेणी में माना। अदालत ने कहा कि पति द्वारा बिना महिला की अनुमति के किया दुष्कर्म बलात्कार है। इसलिए मैरिटल रेप की दशा में भी 24 सप्ताह की तय सीमा में पत्नी अनचाहे भ्रूण को समाप्त करने का अधिकार रखती है। हालांकि भारतीय महिलाएं वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाने वाले कानून के लिए अभी भी संघर्ष कर रही हैं। लेकिन शीर्ष अदालत ने अपनी इस टिप्पणी से इशारा कर दिया कि महिलाएं अपने पार्टनर द्वारा यौन शोषण का शिकार होती हैं।
बच्चे के उपनाम का अधिकार
इसी साल जुलाई 2022 में सर्वोच्च न्यायालय ने माताओं के हक में फैसला सुनाते हुए बच्चे का उपनाम तय करने का अधिकार दिया। पुनर्विवाह करने वाली महिलाओं के लिए यह महत्वपूर्ण फैसला है, जिसमें कहा गया कि बच्चे का एकमात्र प्राकृतिक अभिभावक मां होती हैं, इसलिए बच्चे का उपनाम तय करने का अधिकार मां का है।
महिला क्रिकेटरों का समान वेतन
साल 2022 खेल जगत की महिलाओं के लिए भी उपलब्धियों वाला वर्ष रहा। इस साल भारतीय क्रिकेटरों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने महिला खिलाड़ियों को समान वेतन देने की घोषणा की। इस फैसले के बाद महिला क्रिकेटरों की पुरुष खिलाड़ियों के समान ही आय होगी। इसके पहले तक महिला खिलाड़ियों की कमाई पुरुषों की तुलना में कम थी। क्रिकेट में लैंगिग भेदभाव को दूर करने वाला यह फैसला ऐतिहासिक रहा।

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