Chaturmas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार चातुर्मास का समय मुख्य रूप से आषाढ़ (आधा), श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक (आधा) महीनों को मिलाकर बनता है। शास्त्रों में इस चार महीने की अवधि के लिए गृहस्थों और संन्यासियों, दोनों वर्गों के लिए अलग-अलग नियमों का पालन करने का विधान बताया गया है। इन नियमों का पालन करने से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है।
Chaturmas 2026: चातुर्मास के 4 महीनों में क्या करें और क्या नहीं ? जानिए हर माह का खास महत्व
Chaturmas 2026: वर्तमान में चातुर्मास जारी है और शास्त्रों में इस चार महीने की अवधि के लिए गृहस्थों और संन्यासियों, दोनों वर्गों के लिए अलग-अलग नियमों का पालन करने का विधान बताया गया है। आइए इनके बारे में जानते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गृहस्थों के लिए नियम
इस अवधि में खान-पान पर संयम, सात्विक आहार, दान, पूजा-पाठ और दैनिक दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखने के नियम होते हैं।
संन्यासियों के लिए नियम
संन्यासी इन चार महीनों में पद-यात्रा (विहार) रोककर एक ही स्थान पर निवास (वर्षावास) करते हैं। वे इस समय गहन तपस्या, मौन, स्वाध्याय और ध्यान पर विशेष बल देते हैं।
स्वास्थ्य और आध्यात्मिक दृष्टिकोण
चातुर्मास में बताए गए नियमों का पालन करने से मुख्य रूप से दो बड़े लाभ मिलते हैं
- शारीरिक स्वास्थ्य लाभ-वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। नियमों का पालन करने से पेट और पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है।
- मानसिक स्वास्थ्य व शांति-जप, तप और संयम का पालन करने से मानसिक तनाव दूर होता है और चित्त में शांति बनी रहती है।
- समयावधि- हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी या द्वादशी से शुरू होकर कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तक का 4 महीने का समय 'चातुर्मास' कहलाता है।
- अन्य नाम- इसे चातुर्मास्य, चौमासा और देवशयन भी कहा जाता है।
- धार्मिक मान्यता-माना जाता है कि इन 4 महीनों में भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग पर योगनिद्रा (विश्राम) में रहते हैं।
- साधु-संतों का नियम-इस दौरान साधु-संत यात्राएं नहीं करते और एक ही स्थान पर रहकर वर्षावास (निवास) करते हैं।
- आम लोगों के लिए महत्व- सामान्य लोगों के लिए इस समय मौन रहने, जप, तप और दान करने का विशेष महत्व और कल्याणकारी फल बताया गया है।
- शुरू हो चुके कार्य (आरंभ): यदि कोई कार्य चातुर्मास से पहले ही शुरू किया जा चुका है, तो उसमें सूतक (अशुभता या रुकावट) का नियम लागू नहीं होता।
- नए कार्य (अनारंभ): चातुर्मास के दौरान कोई नया मांगलिक या शुभ कार्य शुरू करना वर्जित माना जाता है।
चातुर्मास के 4 महीने और उनके व्रत (खान-पान के नियम)
पहला महीना: शाक व्रत (हरी सब्जियों का त्याग)
- क्या न खाएं: पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई जैसी सभी हरी पत्तेदार सब्जियां।
- वैज्ञानिक व व्यावहारिक कारण: बारिश की शुरुआत में जमीन पर छोटे कीट-पतंगे बढ़ जाते हैं, जिससे हरी सब्जियों में सूक्ष्म जीव होने की संभावना रहती है।
दूसरा महीना: दधि व्रत (दही का त्याग)
- क्या न खाएं: दही और दही से बनी चीजें जैसे- कढ़ी, रायता, छाछ, लस्सी आदि (कच्चा और पका दोनों प्रकार का भोजन)।
- वैज्ञानिक व व्यावहारिक कारण: वर्षा ऋतु में दही जल्दी खराब हो जाता है और पेट व पाचन से जुड़ी बीमारियां पैदा कर सकता है।