मौजूदा सप्ताह की शुरुआत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की दशमी व एकादशी तिथि के साथ हो रही है। वर्तमान कृष्ण पक्ष इसी सप्ताह 30 तारीख मतलब भाद्रपद की अमावस्या व कुशोत्पाटनी अमावस्या वाले दिन खत्म हो जाएगा। और 31 तारीख से भाद्रपद का शुक्ल पक्ष आरंभ हो जाएगा। इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं इस हफ्ते के व्रत और त्योहार के बारे में जो इस सप्ताह आने वाले हैं।
जानिए इस हफ्ते के व्रत और त्योहार के बारे में, क्या है उनकी महत्वता
26 अगस्त, सोमवार को अजा एकादशी का त्योहार है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्रती की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस व्रत के दौरान भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने से पहले सुबह उठकर स्नान करें और व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान कराएं। फिर पुष्प, धूप वगैरह चढ़ाएं और उनकी आरती करें। बता दें कि भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय हैं, इसलिए उन्हें तुलसीदल भी समर्पित करें।
बुध प्रदोष व्रत, 28 अगस्त
प्रदोष का व्रत भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और व्रती को पुत्री की प्राप्ति होती है। जिस दिन त्रयोदशी तिथि होती है, प्रदोष व्रत को उसी नाम से जाना जाता है। जैसे रवि प्रदोष, सोम प्रदोष, भौमप्रदोष आदि। सभी पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष के व्रत का विधान शास्त्रों में बताया गया है। इस दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और अद्य अहं कृपाप्राप्त्यै सोमप्रदोषव्रतं करिष्ये मंत्र को पढ़कर व्रत का संकल्प लें फिर शिवजी का पूजा-अर्चना करें। और पूरे दिन उपवास रखें। शाम के वक्त एक बार फिर स्नान करें और महादेव की अर्चना कर अन्न ग्रहण करें।
कुशोत्पाटनी अमावस्या, 30 अगस्त
हिंदुओं के सभी धार्मिक क्रिया-कर्मों में कुश और पुष्प का प्रयोग किया जाता है। कुश को ऊर्जा का कुचालक माना जाता है। इसलिए पूजा-पाठ के लिए कुशा के आसन पर बैठकर पूजा करें। शास्त्रों में कुश को दूषित वातावरण को साफ करके संक्रमण फैलने से रोकने वाला, फल देने वाला औषधि और आयु की वृद्धि करने वाला बताया गया है। इसी कारण से सूर्य और चंद्रग्रहण के दौरान इसी कुशा को भोजन और पानी में डाल दिया जाता है ताकि पृथ्वी पर आने वाली किरणें कुशा से टकराकर परावर्तित हो जाती हैं और उनका कोई असर नहीं पड़ता है।
हरितालिका व्रत, 1 सितंबर
भाद्रपद के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका अथवा गौरी तृतीया के व्रत का विधान बताया गया है। यह व्रत महिलाएं रखती हैं, जिसे वे मां पार्वती को समर्पित करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से पति को लंबी आयु प्राप्त होती है और वे मां पार्वती की तरह सुखों को भोगकर स्वर्ग को प्राप्त करती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जल व्रत रहकर अनुष्ठान करती हैं। व्रत से एक दिन पहले महिलाएं अपने हाथों पर मेंहदी रचाती हैं। इस दिन सुबह उठकर घर की साफ-सफाई करें और तिल व आंवले का उबटन लगाकर स्नान करें। और फिर ‘उमामहेश्वर सायुज्यसिद्धये हरितालिकाव्रतं करिष्ये’ इस मंत्र से व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पार्वती और महादेव की प्रतिमा स्थापित कर मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना करें।
