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Narasimha Jayanti 2026: भक्त की पुकार पर प्रकट हुए भगवान नृसिंह, जानिए कथा और पूजा महत्व
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Wed, 29 Apr 2026 01:06 PM IST
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सार
Narasimha Jayanti 2026: हिंदू मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान नृसिंह प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन नृसिंह जयंती मनाई जाती है।
Narasimha Jayanti
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Narasimha Jayanti 2026: सनातन परंपरा में भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनहार के रूप में माना गया है, जिन्होंने समय-समय पर अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए विभिन्न अवतार धारण किए। इन्हीं अवतारों में भगवान नृसिंह का स्वरूप अत्यंत अद्भुत और प्रभावशाली माना जाता है, जो शक्ति, पराक्रम और भक्त-रक्षा का प्रतीक है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान नृसिंह प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन नृसिंह जयंती मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि यह अवतार इस बात का प्रतीक है कि जब-जब धर्म पर संकट आता है, तब ईश्वर किसी भी रूप में प्रकट होकर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और अधर्म का नाश करते हैं।
किन लोगों को करनी चाहिए नृसिंह भगवान की पूजा
धार्मिक मान्यता है कि भगवान नृसिंह की पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी होती है, जो किसी प्रकार के भय, संकट या शत्रुओं से परेशान हों। जो लोग जीवन में बार-बार बाधाओं, अन्याय, मानसिक तनाव या असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, उन्हें नृसिंह भगवान की आराधना अवश्य करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के विवाद, नकारात्मक ऊर्जा या डर से ग्रसित व्यक्ति यदि श्रद्धा से नृसिंह भगवान का स्मरण करता है, तो उसे शीघ्र ही राहत मिलती है और जीवन में साहस और आत्मबल बढ़ता है।
हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की पौराणिक कथा
कश्यप ऋषि के पुत्र हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या कर ब्रह्माजी से ऐसा वरदान प्राप्त किया था कि उसे कोई भी देवता, मनुष्य या जीव मार नहीं सके। इस वरदान के अहंकार में वह स्वयं को ईश्वर मानने लगा और अपनी प्रजा को अपनी पूजा के लिए बाध्य करने लगा। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने उसे कई बार समझाने और डराने का प्रयास किया, परंतु प्रह्लाद अपनी भक्ति से अडिग रहा। उसे मारने के अनेक प्रयास किए गए, जिनमें होलिका के साथ अग्नि में बैठाने का प्रयास भी शामिल था, लेकिन हर बार भगवान की कृपा से वह सुरक्षित बच गया। अंत में क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को खंभे से बांध दिया और पूछा कि उसका भगवान कहां है। जैसे ही उसने प्रह्लाद को मारने का प्रयास किया, उसी खंभे से भगवान नृसिंह प्रकट हुए और संध्या समय, न घर के भीतर न बाहर, अपने नखों से उसका वध कर दिया।
इस पावन दिन प्रातःकाल उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर लाल, सफेद या पीला वस्त्र बिछाएं और भगवान नृसिंह और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पूजा में पंचामृत, फल, पुष्प, पंचमेवा, कुमकुम, केसर, नारियल, अक्षत और पीतांबर अर्पित करें। “ॐ नरसिंहाय वरप्रदाय नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें और जरूरतमंदों को ठंडी वस्तुओं का दान करें।
जैसे भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की, उसी प्रकार नृसिंह भगवान की पूजा करने से भक्तों को हर प्रकार के संकट से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और न्यायालय संबंधी मामलों में सफलता मिलती है। इस पूजा से आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ता है, नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में साहस, तेज और शक्ति का संचार होता है। भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
नृसिंह मंत्र और उसका प्रभाव
नृसिंह जयंती के दिन इस शक्तिशाली मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है।
ॐ उग्रवीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखं।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥
पद्म पुराण के अनुसार भगवान नृसिंह के इस रौद्र स्वरूप की उपासना करने से पापों का नाश होता है और जीवन की अनेक बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
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किन लोगों को करनी चाहिए नृसिंह भगवान की पूजा
धार्मिक मान्यता है कि भगवान नृसिंह की पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी होती है, जो किसी प्रकार के भय, संकट या शत्रुओं से परेशान हों। जो लोग जीवन में बार-बार बाधाओं, अन्याय, मानसिक तनाव या असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, उन्हें नृसिंह भगवान की आराधना अवश्य करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के विवाद, नकारात्मक ऊर्जा या डर से ग्रसित व्यक्ति यदि श्रद्धा से नृसिंह भगवान का स्मरण करता है, तो उसे शीघ्र ही राहत मिलती है और जीवन में साहस और आत्मबल बढ़ता है।
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हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की पौराणिक कथा
कश्यप ऋषि के पुत्र हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या कर ब्रह्माजी से ऐसा वरदान प्राप्त किया था कि उसे कोई भी देवता, मनुष्य या जीव मार नहीं सके। इस वरदान के अहंकार में वह स्वयं को ईश्वर मानने लगा और अपनी प्रजा को अपनी पूजा के लिए बाध्य करने लगा। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने उसे कई बार समझाने और डराने का प्रयास किया, परंतु प्रह्लाद अपनी भक्ति से अडिग रहा। उसे मारने के अनेक प्रयास किए गए, जिनमें होलिका के साथ अग्नि में बैठाने का प्रयास भी शामिल था, लेकिन हर बार भगवान की कृपा से वह सुरक्षित बच गया। अंत में क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को खंभे से बांध दिया और पूछा कि उसका भगवान कहां है। जैसे ही उसने प्रह्लाद को मारने का प्रयास किया, उसी खंभे से भगवान नृसिंह प्रकट हुए और संध्या समय, न घर के भीतर न बाहर, अपने नखों से उसका वध कर दिया।
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नृसिंह जयंती पर पूजा-विधिइस पावन दिन प्रातःकाल उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर लाल, सफेद या पीला वस्त्र बिछाएं और भगवान नृसिंह और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पूजा में पंचामृत, फल, पुष्प, पंचमेवा, कुमकुम, केसर, नारियल, अक्षत और पीतांबर अर्पित करें। “ॐ नरसिंहाय वरप्रदाय नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें और जरूरतमंदों को ठंडी वस्तुओं का दान करें।
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नृसिंह पूजा के लाभ और फलजैसे भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की, उसी प्रकार नृसिंह भगवान की पूजा करने से भक्तों को हर प्रकार के संकट से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और न्यायालय संबंधी मामलों में सफलता मिलती है। इस पूजा से आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ता है, नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में साहस, तेज और शक्ति का संचार होता है। भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
नृसिंह मंत्र और उसका प्रभाव
नृसिंह जयंती के दिन इस शक्तिशाली मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है।
ॐ उग्रवीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखं।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥
पद्म पुराण के अनुसार भगवान नृसिंह के इस रौद्र स्वरूप की उपासना करने से पापों का नाश होता है और जीवन की अनेक बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

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