Happy Vyasa Purnima Guru Purnima 2022 Wishes : आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला व्रत आषाढ़ी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, इसीलिए इसे व्यास पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस साल व्यास पूर्णिमा 13 जुलाई,बुधवार को मनाई जा रही है। महर्षि वेदव्यास को भगवान विष्णु का ही रूप माना जाता है। इन्होने मनुष्य जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया था इसीलिए इन्हें जगत का प्रथम गुरु माना जाता है। इनके जन्मदिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। लोक में सामान्यतः दो गुरु होते हैं। प्रथम तो शिक्षा गुरु और दूसरे दीक्षा गुरु। शिक्षा गुरु बालक को शिक्षित करते हैं और दीक्षा गुरु मनुष्य के अंदर संचित विकारों को निकाल कर उसके जीवन को सत्यपथ की ओर अग्रसित करते हैं। आज भी गुरु की महत्ता को बनाए रखने के लिए ही गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।
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Happy Guru Purnima 2022 : गुरु पूर्णिमा आज, धर्मग्रंथों के इन श्लोक और दोहों से जानिए गुरु की महत्ता
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 13 Jul 2022 09:37 AM IST
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Happy Guru Purnima 2022 Wishes: इस साल व्यास पूर्णिमा 13 जुलाई,बुधवार को मनाई जा रही है। महर्षि वेदव्यास को भगवान विष्णु का ही रूप माना जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
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Happy Guru Purnima 2022 Wishes
- फोटो : अमर उजाला
श्रीमदभगवतगीता में कहा गया है-
देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्।
ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते।।
अर्थात देवता,ब्राह्मण,गुरु और ज्ञानीजनों का पूजन,पवित्रता,सरलता,ब्रह्चर्य,और अहिंसा-ये शरीर संबंधी तप कहलाते हैं। जो मनुष्य ज्ञान दे और ब्रह्म की ओर ले जाए उसे गुरु कहते हैं।
देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्।
ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते।।
अर्थात देवता,ब्राह्मण,गुरु और ज्ञानीजनों का पूजन,पवित्रता,सरलता,ब्रह्चर्य,और अहिंसा-ये शरीर संबंधी तप कहलाते हैं। जो मनुष्य ज्ञान दे और ब्रह्म की ओर ले जाए उसे गुरु कहते हैं।
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Happy Guru Purnima 2022 Wishes
- फोटो : अमर उजाला
संत कबीर ने कहा था कि -
गुरु गोविन्द दोऊ खड़े,काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरु अपने गोविन्द दियो बताय।।
अर्थात गुरु और गोविन्द (भगवान)एक साथ खड़े हों तो किसे प्रणाम करना चाहिए –गुरु को अथवा गोविन्द को? ऐसी स्थिति में गुरु के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
गुरु गोविन्द दोऊ खड़े,काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरु अपने गोविन्द दियो बताय।।
अर्थात गुरु और गोविन्द (भगवान)एक साथ खड़े हों तो किसे प्रणाम करना चाहिए –गुरु को अथवा गोविन्द को? ऐसी स्थिति में गुरु के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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गुरुगीता के अनुसार-
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।
अर्थात,गुरु ही ब्रह्मा है,गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।
अर्थात,गुरु ही ब्रह्मा है,गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।
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संत शिरोमणि तुलसीदास ने भी गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना है।
गुरु बिनु भवनिधि तरइ न कोई।
जों बिरंचि संकर सम होई।।
अर्थात, भले ही कोई ब्रह्मा, शंकर के समान क्यों न हो, वह गुरु के बिना भव सागर पार नहीं कर सकता।
संत तुलसीदास जी रामचरितमानस में लिखते हैं-
बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर।।
अर्थात्, गुरु मनुष्य रूप में नारायण ही हैं। मैं उनके चरण कमलों की वन्दना करता हूं। जैसे सूर्य के निकलने पर अन्धेरा नष्ट हो जाता है,वैसे ही उनके वचनों से मोहरूपी अन्धकार का नाश हो जाता है।
गुरु बिनु भवनिधि तरइ न कोई।
जों बिरंचि संकर सम होई।।
अर्थात, भले ही कोई ब्रह्मा, शंकर के समान क्यों न हो, वह गुरु के बिना भव सागर पार नहीं कर सकता।
संत तुलसीदास जी रामचरितमानस में लिखते हैं-
बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर।।
अर्थात्, गुरु मनुष्य रूप में नारायण ही हैं। मैं उनके चरण कमलों की वन्दना करता हूं। जैसे सूर्य के निकलने पर अन्धेरा नष्ट हो जाता है,वैसे ही उनके वचनों से मोहरूपी अन्धकार का नाश हो जाता है।

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