Vaishakh Purnima 2026: हिंदू धर्म में वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष वैशाख पूर्णिमा 1 मई 2026 को मनाई जा रही है। शास्त्रों के अनुसार, इस पावन दिन पर पूजा-पाठ व दान जैसे कार्य करने पर जीवन में सुख-शांति बढ़ती हैं। इसके अलावा यह तिथि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि लेकर आती हैं। हालांकि, यह दिन न केवल पूजा-पाठ बल्कि कुछ विशेष चीजों के दान के लिए भी कल्याणकारी होती है। इससे मानसिक शांति और आत्मिक संतोष भी बढ़ता है। ऐसे में आइए दान से जुड़ी चीजों के बारे में जानते हैं।
Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा पर इन चीजों का दान होगा लाभकारी, धन लाभ के खुलेंगे मार्ग
Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा के दिन किए गए दान का महत्व बहुत अधिक बताया गया है, जिससे व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और भाग्य का साथ मिलने लगता है। आइए इनके बारे में जानते हैं।
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दूध का दान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा पर जरूरतमंदों को दूध का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। इससे चंद्रमा मजबूत होता है और मन को शांति मिलती है।
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चावल का दान
वैशाख पूर्णिमा पर चावल का दान करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही आर्थिक तंगी भी दूर होने लगती है।
चीनी का दान
वैशाख पूर्णिमा पर के दिन चीनी का दान करना शुभ होता है। इससे जीवन में मिठास और रिश्तों में मधुरता आती है।
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सफेद वस्त्र का दान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सफेद कपड़ों का दान करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में शांति का अनुभव होता है।
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अन्न दान
हिंदू धर्म में अन्न दान को सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है। इस दिन भूखे और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी होता है, जिससे सभी देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती हैं।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।

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