Navratri 2019: यहां रखे कलश से मिलता है कई गुना फायदा, जानें शुभ मुहूर्त और विधि
घटस्थापना में सर्वप्रथम खेत की मिट्टी लाकर उसमें पांच प्रकार के धान बोएं जाते है। पांच प्रकार के धानों में गेहूं, जौ, चना, तिल, मूंग आदि होते हैं। जल, चंदन, पुष्प, दूर्वा, अक्षत, सुपारी तथा सिक्के मिट्टी अथवा तांबे के कलश में रखें जाते है। यदि घटस्थापना के मंत्र मालूम न हों, तो सभी वस्तुओं के नाम लेते हुए 'समर्पयामि' का उच्चारण करें। शास्त्रीय विधि से कलश में डाले जाने वाले सभी पदार्थ न मिलने पर चंदन, रोली, हल्दी की गांठ, सुपारी, एक रुपए का सिक्का, गंगाजल व दूर्वादल भी कलश में डाल सकते हैं।
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ढककर रखें कलश
कलश स्थापना करने से पहले यह ध्यान रखें कि जिस जगह कलश स्थापित किया जाएगा वो जगह साफ होनी चाहिए। कलश स्थापना के लिए एक लकड़ी का पाटा लें और उस पर नया व साफ लाल कपड़ा बिछाएं। ध्यान देने वाली बात यह है कि कलश का मुंह खुला न छोड़ें, उसे ढक कर रखें। वहीं अगर कलश को किसी ढक्कन से ढका है तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें।
जलाएं अखंड दीपक
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6.16 से लेकर 7.40 मिनट तक है। इसके अलावा 11.48 से 12.35 तक भी कलश स्थापित किया जा सकता है। उत्तर पूर्व दिशा देवताओं की दिशा है। इसलिए, इस दिशा में माता की प्रतिमा और घट स्थापना करें। स्थापना और पूजा करने के बाद माता को फल व मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के समय दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अखंड दीपक जलाएं जो 9 दिन तक जलता रहे।
