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Maha Shivaratri 2021: जानिए भगवान शिव, मस्तक पर चंद्रमा, गले में भुजंग और जटा में क्यों धारण करते हैं गंगा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Wed, 03 Mar 2021 04:23 PM IST
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महाशिवरात्रि 2021
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फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि का त्योहार 11 मार्च 2021 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब शिव जी बारात लेकर राजा हिमालय के यहां पहुंचे तो पार्वती जी की माता उनके रूप को देखकर बेहोश हो गई थी। भगवान भोले नाथ का स्वरूप सभी देवों से निराला है। वे अपने शरीर पर भस्म, माथे पर चंद्रमा, अपनी जटा में गंगा और गले में भुजंग धारण करते हैं। क्या आपको पता है कि वह अपने गले में नाग, जटा में गंगा, सिर पर चंद्रमा और हाथ में त्रिशूल-डमरू क्यों धारण करते हैं। तो आइए जानते हैं इस बारे में।
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- फोटो : Social media
पौराणिक कथा के अनुसार अपने पूर्वजों को जीवन-मरण के दोष से मुक्त करने के लिए भागीरथ ने माता गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए कठोर तप किया। उनके तप से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हो गईं, परंतु उन्होंने भागीरथ से कहा कि उनका वेग पृथ्वी सहन नहीं कर पाएगी और रसातल में चली जाएगी। तब भागीरथ ने भगवान भोलेनाथ की आराधना की। शिव उनकी पूजा से प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा। तब भागीरथ ने सारा कथन बताया। इसके बाद भगवान शिव नें गंगा को अपनी जटा में धारण कर लिया।
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शिवपुराण में मिलने वाली कथा के अनुसार महाराज दक्ष ने अपनी 27 कन्याओं का विवाह चंद्रमा के साथ किया था, परंतु चंद्रमा को रोहिणी से अत्यधिक प्रेम था। तब दक्ष की पुत्रियों नें इस बात की शिकायत उनसे की तो दक्ष ने क्रोध में चंद्रमा को क्षय रोग से ग्रसित होने का श्राप दे दिया। जिसके बाद चंद्रमा नें भगवान शिव की पूजा-आराधना की। जिसके पाद भगवान भोलेनाथ की कृपा से चंद्रमा को क्षय रोग से मुक्ति प्राप्त हो गई। इसके साथ ही चंद्रमा की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण किया।
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भगवान शिव ही एक ऐसे देवता है जो अपने गले में आभूषणों के स्थान पर सर्प धारण करते हैं। क्या आपको पता है कि यह कौन सा सर्प है? पौराणिक कथाओं के अनुसार वासुकी नाग भगवान शिव के परम भक्त थे। जब अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन हुआ तब वासुकी नाग को रस्सी के स्थान पर प्रयोग किया था। उनकी भक्ति से भगवान भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने वासुकी नाग नागलोक का राजा बनाया और अपने गले में आभूषण के रूप में धारण किया।
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भगवान भोले नाथ अपने शरीर पर भस्म धारण करते हैं। कहा जाता है कि वे शमशान के निवासी हैं। भगवान शिव को कालों का भी काल माना गया है। शरीर पर भस्म धारण करके संसार के यह संदेश देते हैं कि यह शरीर नश्वर है। इसलिए मिट्टी की काया पर कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए।
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