Makar Sankranti 2026: भगवान सूर्य की राशि परिवर्तन से प्रकृति में होने वाली क्रांति का पर्व है मकर संक्रांति। इस दिन भगवान सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण हो जाते हैं। सूर्य के उत्तरायण होते ही प्रकृति में परिवर्तन आरंभ हो जाता है। दिन बड़े होने लगते हैं और प्रकाश की अवधि बढ़ने लगती है। साथ ही शीत ऋतु का प्रकोप कम होना आरंभ हो जाता है। सनातन धर्म में पर्व-व्रत निर्धारण के लिए ऋषियों द्वारा प्रतिपादित व्यवस्था के अनुकूल सूर्य सिद्धांत आदि पारंपरिक गणित के आधार पर 14 जनवरी बुधवार की रात 9 बजकर 39 मिनट पर सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
Makar Sankranti 2026: तिल द्वादशी और वृद्धि योग के संयोग में 15 जनवरी को मनाया जाएगा मकर संक्रांति का पर्व
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण हो जाते हैं। सूर्य के उत्तरायण होते ही प्रकृति में परिवर्तन आरंभ हो जाता है। आइए जानते हैं इस साल मकर संक्रांति का पर्व किस दिन मनाया जाएगा।
हालांकि कुछ पंचांग में मकर संक्रांति का समय 14 जनवरी को दोपहर में 03 बजकर 13 मिनट पर बताया गया है और उसका पुण्य काल 03:13 बजे से शाम 05:45 बजे तक है इस वजह से लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि कई जगहों पर लोग 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाते हैं, चाहें सूर्य गोचर कभी भी हो लेकिन यह उचित नहीं है क्योंकि मकर संक्रांति का पर्व सूर्य की संक्रांति पर निर्भर करता है न कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 14 या 15 जनवरी को।
मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान को ग्रह दोष शमन के लिए श्रेष्ठ माना गया है। विशेषकर चावल और उड़द दाल का दान अत्यंत शुभ फल प्रदान करता है, मकर संक्रांति पर यदि एकादशी का संयोग हो, तो शास्त्रों के अनुसार चावल ग्रहण व दान वर्जित माना जाता है। ऐसी स्थिति में भी मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाना उचित रहेगा, क्योंकि उस दिन द्वादशी है और खिचड़ी का दान और सेवन किया जा सकता है।
- इस वर्ष मकर संक्रांति पर तीन शुभ योगों की युति बन रही है, जिससे पर्व का पुण्यफल कई गुना बढ़ गया है। संयोगवश इसी दिन माघ मास की तिल द्वादशी भी है।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ कृष्ण द्वादशी को भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इस दिन तिल का दान और तिल का सेवन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इसके साथ ही पर्व के दिन वृद्धि योग का संयोग भी बन रहा है।
- ज्योतिष शास्त्रों में वृद्धि योग को शुभ कार्यों, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष फलदायी बताया गया है। माघ मास में मकर संक्रांति का पड़ना स्वयं में शुभ माना जाता है।
मकर संक्रांति स्नान-दान मुहूर्त-
मान्यतानुसार स्नान और दान के लिए सूर्योदय काल का समय उत्तम माना गया है. उसमें भी ब्रह्म मुहूर्त तो सर्वोत्तम होता है. ऐसे में देखा जाए तो 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना सही है. उस दिन प्रातः काल मुहूर्त में स्नान और दान करें।
15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन पुण्य काल दोपहर में 01बजकर 39 मिनट तक है. ऐसे में मकर संक्रांति का स्नान और दान सूर्योदय से लेकर दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक कर सकते हैं।