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Lohri Festival: क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व ? जानिए इसके पीछे का महत्व और परंपराएं
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 12 Jan 2026 02:47 PM IST
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सार
Lohri Significance: लोहड़ी पंजाब और हरियाणा का प्रसिद्ध त्योहार है। लोहड़ी में गीतों का बड़ा महत्व है। इसमें लोग लोकगीत के साथ नृत्य करके इस पर्व को मनाते हैं।
लोहड़ी की शुभकामनाएं 2026
- फोटो : Amar ujala
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विस्तार
Lohri 2026: कल, 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व बड़े ही जोश, उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा। लोहड़ी का पर्व खुशियों और आनंद काप्रतीक माना है। यह पर्व मुख्य रूप दिल्ली, पंजाब और हरियाणा समेत उत्तरी भारत में मनाया जाता है। लोहड़ी की लोकप्रियता के चलते है त्योहार अब देश के करीब हर एक हिस्से में भी मनाया जाता है। लोहड़ी पर्व मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाने वाला त्योहार होता है। यह त्योहार शरद ऋतु के खत्म होने और गर्मी के आगमन का प्रतीक है। इसके अलावा यह पर्व किसानों के लिए भी विशेष महत्व होता है। जिसमें नई फसलों के स्वागत के लिए और प्रकृति का प्रति गहरी आस्था दिखाने का पर्व है। आइए जानते हैं लोहड़ी पर्व का महत्व और परंपराएं।
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लोहड़ी के त्योहार का महत्व और परंपराएं
फसलों के तैयार होने का उत्सव: लोहड़ी के पर्व नई फसलों के तैयार होने और और उसकी कटाई का प्रतीक का होता है। इसमें रबी की फसल तैयार होती हैं।
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अग्नि पूजा का महत्व: लोहड़ी पर्व पवित्र अग्नि के प्रति अपनी श्रद्धा भाव दिखाने का पर्व है। इसमें अग्नि जलाई जाती है और उसमें मूंगफली, गुड़, तिल और रेवड़ी को अर्पित की जाती है।
दुल्ला भट्टी की कहानी: लोहड़ी का पर्व लोकगीत और कहानी दुल्ला भट्टी को समर्पित होता है। जिसमें मुगलकाल में दुल्ला भट्टी के द्वारा गरीब लड़कियों की मदद की गई थी।
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लोहड़ी गीत का महत्व
- लोहड़ी पर्व पर लोकगीतों का विशेष महत्व होता है।
- इस दिन लोग लोकगीत के अलावा नृत्य करके पर्व को मनाते हैं।
- लोक गीत के माध्यम से लोग पंजाबी योद्धा दुल्ला भट्टी को याद किया जाता है।
- इस दिन गीतों के जरिए से अच्छी फसल की कामना करते हैं।
- लोकगीत गाने के साथ लोग ढ़ोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा करते हुए त्योहार का जश्न मनाते हैं।
लोहड़ी के रीति-रिवाज
- लोहड़ी का पर्व प्रकृति के प्रति आभार जताने का पर्व है।
- लोहड़ी पंजाब और हरियाणा राज्य का प्रसिद्ध त्योहार है
- इस पर्व को मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व भोगी मनाया जाता है। जिसमे पुरानी चीजों को बदला जाता हैं।
- आग जलाने के लिए लकड़ी, पुराना फर्नीचर आदि का भी इस्तेमाल करते हैं।
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