Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि, इस शुभ दिन पर विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। कहा जाता है कि, प्रदोष व्रत के प्रभाव से मनचाहा साथ पाने की कामना भी पूर्ण होती है। साथ ही वैवाहिक जीवन मधुरमय बनता है। इस दिन शिवलिंग पर कुछ खास चीजें अर्पित करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का वास भी होने लगता है। वर्तमान में चैत्र माह जारी है और इस महीने में प्रदोष व्रत 16 मार्च 2026 को रखा जाएगा। इस दिन सोमवार का शुभ संयोग बना हुआ है। ऐसे में शिवलिंग पर ये 5 चीजें चढ़ाने से सभी तरह के संकटों का निवारण हो सकता है। आइए इनके बारे में जानते हैं।
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Pradosh Vrat 2026: कब है चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत, जानें तिथि और महादेव को प्रसन्न करने का उपाय
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Megha Kumari
Updated Tue, 10 Mar 2026 01:26 PM IST
सार
Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत पर महादेव की पूजा-अर्चना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती हैं।
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Pradosh Vrat 2026
- फोटो : अमर उजाला
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Pradosh Vrat 2026
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कब है प्रदोष व्रत
- पंचांग के मुताबिक, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 16 मार्च को सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर प्रारंभ होगी।
- इस तिथि का समापन 17 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 23 मिनट पर है।
- प्रदोष काल के अनुसार, प्रदोष व्रत 16 मार्च 2026 को ही रखा जाएगा।
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Pradosh Vrat 2026
- फोटो : freepik
प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
16 मार्च 2026 को प्रदोष व्रत पर शाम 6 बजकर 30 मिनट से पूजा का समय प्रारंभ होगा। यह रात 8 बजकर 54 मिनट तक बना रहेगा। इस अवधि में शिवलिंग की पूजा और भोलेनाथ को 11 बेलपत्र चढ़ाने से वह प्रसन्न होते हैं।
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शिवलिंग पर अर्पित करें ये 5 चीजें
- प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती हैं। साथ ही व्यक्ति के मन को शांति मिलती हैं।
- शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में कमी आती हैं। माना जाता है कि, इससे व्यक्ति रोगों से दूर रहता है।
- सोम प्रदोष के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं।
- शिवलिंग पर गेहूं अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
- शमी के फूल भगवान शिव को अर्पित करने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती हैं। इसे समर्पित करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आने लगते हैं।
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Pradosh Vrat 2026
- फोटो : Amar Ujala
शिव जी की आरती
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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