Adhik Maas 2026 Ekadashi Date: सामान्य वर्ष में 12 महीने और 24 एकादशियां होती हैं। लेकिन अधिकमास वाले वर्ष में 13 महीने और कुल 26 एकादशियां हो जाती हैं। इस साल ज्येष्ठ का महीना अधिकमास के कारण 30 के बजाय 60 दिनों का होगा (17 मई से 15 जून 2026 तक अधिकमास रहेगा)। इसके कारण इस अवधि में सामान्य 2 एकादशियों का शुभ संयोग पड़ने वाला है। आइए इनके बारे में जानते हैं।
Adhik Maas 2026: अधिकमास में पद्मिनी और परमा एकादशी का संयोग, जानें पूजा विधि और महत्व
Adhik Maas 2026 Ekadashi: 17 मई 2026 से अधिक मास यानी पुरुषोत्तम माह की शुरुआत हो चुकी है। यह माह 15 जून 2026 तक बना रहेगा। इसमें भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करना बेहद शुभ होता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।
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अधिकमास की विशेष 2 एकादशियां
तीन साल में एक बार आने वाले इस दुर्लभ संयोग में 27 मई 2026 को पद्मिनी एकादशी और 11 जून 2026 को परमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह आध्यात्मिक उन्नति, धन-वैभव और मोक्ष प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को स्वयं इन दोनों एकादशियों के व्रत की विधि और महत्व बताया था। चूंकि अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं, इसलिए इन एकादशियों का फल अनंत गुना हो जाता है।
पद्मिनी एकादशी (कमला एकादशी)
तिथि: 27 मई 2026 (बुधवार)
पक्ष: अधिकमास का शुक्ल पक्ष
नियम/विधि: इसका व्रत दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है। दशमी के दिन कांसे के बर्तन में जौ-चावल का भोजन करना चाहिए और नमक का त्याग करना चाहिए।
महत्व व फल: यह व्रत सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी करता है। इससे व्यक्ति को कीर्ति (यश), वैभव और संतान सुख की प्राप्ति होती है। जीवन के भौतिक कष्ट दूर होते हैं और मृत्यु के बाद दुर्लभ बैकुंठ धाम मिलता है।
परमा एकादशी (पुरुषोत्तमी एकादशी)
तिथि: 11 जून 2026 (गुरुवार)
पक्ष: अधिकमास का कृष्ण पक्ष
विशेष कर्म: इस दिन स्वर्ण दान, विद्या दान, अन्न दान, भूमि दान और गौदान (पंचदान) करने का विशेष महत्व है।
महत्व व फल
जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह 'परम' सिद्धियों और ऐश्वर्य को देने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से घोर दरिद्रता और आर्थिक तंगी का नाश होता है। यह अज्ञात पापों से मुक्ति देकर उत्तम गति प्रदान करती है।
अधिकमास की एकादशियों की सरल पूजा विधि
- अधिकमास की इन विशेष एकादशियों (पद्मिनी और परमा एकादशी) की पूजा विधि लगभग समान होती है।
- व्रत की पूर्व संध्या (दशमी तिथि- एक दिन पहले)
- एकादशी से एक दिन पहले (दशमी को) सात्विक भोजन करें।
- कांसे के बर्तन में भोजन करने और नमक का त्याग करने का प्रयास करें।